इस्लामाबाद/नई दिल्ली | ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने पाकिस्तान में नफरत की आग भड़का दी है। कराची से लेकर गुलाम कश्मीर (PoK) तक के शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है, जिसमें अब तक 35 निर्दोष नागरिकों की जान जा चुकी है और 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सबसे भयावह स्थिति कराची, गिलगित और स्कर्दू में देखी जा रही है, जहाँ प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सीधी झड़प हो रही है। इस मानवीय त्रासदी के कारण चारों तरफ दहशत का माहौल है और सीमा पार के रिश्तों के साथ-साथ पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा भी गंभीर संकट में घिरी हुई है।
बिगड़ते हालातों के मद्देनजर, पाकिस्तान के कई प्रांतों में सरकारी अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है ताकि घायलों को तुरंत उपचार मिल सके। हालांकि, प्रशासन पर आंकड़ों को छिपाने के गंभीर आरोप भी लग रहे हैं। इस अराजकता को देखते हुए अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए कड़ी सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें भीड़-भाड़ वाले और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है। कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है, लेकिन स्थिति अभी भी नियंत्रण से बाहर नजर आ रही है।
पड़ोसी मुल्क में मचे इस कोहराम और मध्य पूर्व के तनावपूर्ण हालातों को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह सतर्क है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए आज सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है। भारत सरकार का मुख्य फोकस युद्ध प्रभावित क्षेत्रों और पड़ोसी देशों में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, क्योंकि पाकिस्तान में अस्थिरता का सीधा असर भारत की सीमावर्ती सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन पर पड़ने की प्रबल संभावना है।

