वाशिंगटन | अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जारी ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में सैन्य तकनीक की सीमाएं लांघते हुए पहली बार एंथ्रोपिक (Anthropic) की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेवाओं और क्लाउड टूल्स का इस्तेमाल किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पेंटागन ने इन AI टूल्स के जरिए जटिल टारगेट एनालिसिस और रसद आपूर्ति को नियंत्रित किया। इसके साथ ही, अमेरिकी वायुसेना ने अपने सबसे शक्तिशाली B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स को तैनात कर ईरान की जमीन के काफी नीचे बनी सुरक्षित मिसाइल फैसिलिटीज पर 2,000 पाउंड के बमों से हमला किया। यह तकनीक इतनी सटीक थी कि ईरान के परमाणु और सामरिक ठिकानों को भारी क्षति पहुँची है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी तस्वीरों और वीडियो फुटेज से खुलासा हुआ है कि इस युद्ध में ‘LUCAS’ (लो-कॉस्ट अनमैन्ड कॉम्बैट अटैक सिस्टम) नामक नए सुसाइड ड्रोन्स का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया है। पेंटागन ने पहली बार ईरान के शाहेद ड्रोन की तर्ज पर ‘वन-वे अटैक ड्रोन’ का इस्तेमाल कर पलटवार किया है। इसके अलावा, F/A-18 और अत्याधुनिक F-35 फाइटर जेट्स ने तेहरान के हृदय स्थल में मौजूद सरकारी एसेट्स को निशाना बनाया। CENTCOM ने सोशल मीडिया पर ‘हमले जारी हैं’ के संदेश के साथ पिछले 24 घंटों में नष्ट किए गए लक्ष्यों की एक लंबी सूची भी साझा की है।
28 फरवरी को शुरू हुए ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के तहत इजराइल और अमेरिका के संयुक्त मिसाइल हमलों ने ईरान के नेतृत्व को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी मीडिया ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इन हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्य मारे गए हैं। सोमवार सुबह भी इजराइली वायुसेना ने तेहरान के मध्य में ‘आतंकी शासन’ के ठिकानों पर बमबारी जारी रखी। अमेरिकी और इजराइली रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन आधुनिक हथियारों के प्रयोग से ईरान की जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता लगभग शून्य हो गई है।

