भारत पहले यूथ डेल्फिक गेम्स में भाग लेगा

नयी दिल्ली, 01 मार्च (वार्ता) भारत बिश्केक, किर्गिज़स्तान में आयोजित पहले यूथ डेल्फिक गेम्स में भाग लेगा। भारतीय दल में 41 युवा कलाकार शामिल होंगे -जिसमें 21 दिल्ली से ,10 हिमाचल प्रदेश से, चार कर्नाटक से और एक-एक उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और हरियाणा से शामिल हैं। भारतीय दल 22 मार्च को बिश्केक के लिए रवाना होगा। आधुनिक पाइथियन गेम्स के संस्थापक बिजेन्दर गोयल ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी देते हुए कहा,”मैं इतिहास में पहली बार, आधिकारिक रूप से संगठित राष्ट्रीय युवा कलाकारों की टीम को पहले यूथ डेल्फिक गेम्स (एससीओ सदस्य देशों) में भाग लेने के लिए भेज रहा है। यह कोई सामान्य सांस्कृतिक यात्रा नहीं है। यह भारत की वैश्विक सांस्कृतिक प्रतियोगिता के मंच पर औपचारिक एंट्री है-ठीक वैसे ही जैसे खेलों में हमारी टीमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करती हैं। बिजेन्दर गोयल ने कहा,”हमारे युवा कलाकार भारत का प्रतिनिधित्व संगीत, नृत्य, गायन, लोक कलाओं, दृश्य कला, कला एवं शिल्प, पियानो और कई अन्य रचनात्मक विधाओं में करेंगे। ये सिर्फ कलाकार नहीं हैं, बल्कि भारत के युवा सांस्कृतिक दूत हैं। डेल्फिक गेम्स की प्रेरणा प्राचीन ग्रीस के पाइथियन गेम्स से मिली है, जो दुनिया के सबसे पुराने सांस्कृतिक खेल माने जाते हैं।”

उन्होंने कहा, ”जहाँ ये खेल कला और रचनात्मकता का उत्सव मनाते हैं, वहीं मॉडर्न पाइथियन गेम्स एक कदम आगे बढ़कर कला, संस्कृति, मार्शल आर्ट्स और पारंपरिक खेलों-ऑनलाइन और ऑफलाइन-सबको एक ही वैश्विक मंच पर लाते हैं। यह मंच सबको अवसर देने के लिए बनाया गया है, जहाँ भागीदारी का अधिकार सबसे अहम है। यह गर्व की बात है कि भारत ने इन प्राचीन सांस्कृतिक खेलों को आधुनिक रूप में फिर से जीवित करने की वैश्विक पहल की है, जिसे आज हम मॉडर्न पाइथियन गेम्स के नाम से जानते हैं।” गोयल ने कहा,”एक और महत्वपूर्ण बात मैं साझा करना चाहता हूँ। रूस के साथ, इंटरनेशनल डेल्फिक कमेटी, मॉस्को के माध्यम से हमारा औपचारिक सहयोग और समझौता ज्ञापन हुआ है। इस साझेदारी से मॉडर्न पाइथियन गेम्स को वैश्विक पहचान मिली है और भारत एक नए अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक ढांचे के केंद्र में आया है। यह पहचान सिर्फ पाइथियन गेम्स के लिए नहीं, बल्कि दुनिया में भारत की सांस्कृतिक नेतृत्व भूमिका के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक कला और संस्कृति वैश्विक स्तर पर बिखरी हुई रहीं। मॉडर्न पाइथियन गेम्स के माध्यम से हम एक संगठित, पारदर्शी और समावेशी सांस्कृतिक व्यवस्था बना रहे हैं-ऑनलाइन और ऑफलाइन-जहाँ कलाकारों को सम्मान, अवसर और वैश्विक मंच मिलता है।” गोयल ने कहा, ”आने वाले वर्षों में मॉडर्न पाइथियन गेम्स लाखों कलाकारों के लिए अवसर पैदा करेंगे, आर्थिक मूल्य बनाएँगे और भारत को वैश्विक सांस्कृतिक कैलेंडर में स्थायी स्थान दिलाएँगे-जैसे ओलंपिक ने खेलों के लिए किया।”

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