
तेहरान। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की कथित हत्या के बाद देश में शोक और आक्रोश का माहौल गहरा गया है। इसी बीच पवित्र शहर कुम स्थित जमकरण मस्जिद की गुंबद पर बदले का प्रतीक माना जाने वाला लाल झंडा फहराया गया है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार यह कदम शीर्ष ईरानी नेताओं की मौत के बाद न्याय और प्रतिशोध की मांग को दर्शाता है।
शिया परंपरा में लाल झंडा अन्याय के खिलाफ संघर्ष और शहादत की याद का प्रतीक माना जाता है। विश्लेषकों का कहना है कि मस्जिद पर इस झंडे का फहराया जाना महज धार्मिक संकेत नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी है। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान के भीतर एक वर्ग अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सख्त जवाबी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, हालिया हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक नेताओं के मारे जाने के दावों के बाद देशभर में विरोध-प्रदर्शन तेज हुए हैं। कुम, मशहद और तेहरान समेत कई शहरों में लोगों ने रैलियां निकालकर कड़ी प्रतिक्रिया की मांग की है। धार्मिक नेताओं ने भी इसे राष्ट्रीय अपमान बताते हुए एकजुटता का आह्वान किया है।
क्षेत्रीय हालात पहले ही तनावपूर्ण थे, लेकिन इस घटना के बाद मध्य-पूर्व में संघर्ष के और भड़कने की आशंका बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने की अपील की है, जबकि ईरान समर्थक समूह इसे न्याय की लड़ाई बता रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लाल झंडा फहराने का कदम प्रतीकात्मक जरूर है, लेकिन इसके राजनीतिक और सैन्य निहितार्थ दूरगामी हो सकते हैं। आने वाले दिनों में ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय समीकरणों पर दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।
