डां संजय पयासी
सतना: खुलेआम वित्तीय अनियमिताओं के सामने आ रहे मामलों ने अब व्यवस्था का ऐसा चेहरा सामने ला दिया है.जिसको लेकर लोगों को सोचने के लिए विवश होना पड़ रहा है.सीधी में लोकायुक्त द्वारा भू अर्जन अधिकारी को एक लाख रूपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया जाना कई पक्षों में अन्य कार्यवाई से भिन्न थी.यह बात अलग है कि इसकी चर्चा विन्ध्य के वजाए देश और प्रदेश के अन्य हिस्सों में शायद ही होगी.आम आदमी को बेचैन करने वाले इस घटनाक्रम ने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
प्रकाश में आए इससे जुडे तथ्यों में जो बात सबसे ज्यादा खटक रही है.उसमें नौ डिसमिल जमीन का मुआवजा एनएच आई 27 लाख कैसे दे सकता है.यदि इतना एवार्ड पारित भी किया गया तो उसका आधा हिस्सा किसान को उस अधिकारी को देना होगा जिसके माध्यम से इस एवार्ड का चेक प्राप्त होना है.इस पूरे मामले की देश की किसी बडी और गम्भीर एजेन्सी से जांच कराई जानी चाहिए,क्योकि इस क्षेत्र में बडे पैमाने पर रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा जमीनों का अधिग्रहण कर करोड़ो का एवार्ड बाटां गया है.
आपसी मिलीभगत का ऐसा नमूना अभी तक देश के किसी हिस्से में देखने सुनने को नहीं मिला.इस घटना से जुडा एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि सम्बन्धित अधिकारी के ऊपर लोकायुक्त ने 2018 में आय से अधिक सम्पत्ति का मामला दर्ज कर रखा है.इसके बावजूद व्यवस्था ने उसी अधिकारी को भू अर्जन का दायित्व सौप रखा है.शासन और प्रशासन की इस मिलीभगत का दंश झेल रही विन्ध्य की जनता की हिमायत करने वाला अब कोई नहीं बचा.सत्ता और विपक्ष की मूक सहमति से खेले जा रहे इस खेल को अब बन्द होना चाहिए.यही वजह है कि विन्ध्य में कोई भी बडी परियोजना समय पर पूरी नहीं होती.दोनों पक्ष तब तक मामलों को अधर में लटकाए रखते हैं.जब तक उससे अधिक से अधिक कमाया नहीं जा सके.
