
ब्यावरा। नवरात्रि के समापन पर झांकी पाण्डालो में विराजमान प्रतिमाओं का स्थानीय अजनार नदी में विसर्जन किया गया. विसर्जन के बाद प्रतिमाओं के जो अवशेष शेष रह गये वह नदी में महिनों बाद आज तक जस के तस मौजूद है, जो कि हर आने-जाने वाले की भावनाओं को आहत कर रहे है.
नवरात्रि के समापन के बाद प्रतिमाओं का अजनार नदी में विसर्जन किया गया था. विसर्जन के बाद प्रतिमाओं के अवशेष को ससम्मान निकालकर एक तरफ किया जाता है, किंतु विसर्जन के 5 माह गुजरने के बाद भी अजनार नदी में प्रतिमा के अवशेष देख हर कोई स्तब्ध रह जाता है. नपा द्वारा इन अवशेष को ससम्मान एक तरफ सुरक्षित करने तक का प्रयास
नहीं किया गया. इस संबंध में आज सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सुश्री रचना
हर जिम्मेदारों का होता है आना-जाना
सिविल अस्पताल रोड पर पुल के यहां नदी का पानी काफी दूषित है, वहीं पर प्रतिमा के अवशेष देखे जा सकते है, जबकि हर दिन इस मार्ग पर से जिम्मेदारों का आना-जाना लगा रहता है, नदी में मौजूद यह अवशेष सभी को नजर आते है परन्तु किसी ने इस और ध्यान नहीं दिया. यदि ध्यान गया भी तो इसको अनदेखा कर दिया गया.
सबसे प्रदूषित नजर आती अजनार नदी
स्थानीय अजनार नदी की दयनीय स्थिति देख हर किसी के मन में एक पीड़ा का भाव बन जाता है, आज अजनार नदी की जो दुर्दशा हो रही है वह किसी से छुपी नहीं है.
भार्गव ने सोशल मीडिया के माध्यम से नपा और प्रशासन तथा सरकार से इस दिशा में ध्यान देते हुए हमारे हिन्दू देवी देवताओं के इस प्रकार होने वाले अपमान पर विराम लगाने की मांग करते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की है.
