राजगढ़: तीन दिवसीय कृषि सम्मेलन, कृषि प्रदर्शनी एवं एनएमईओ अंतर्गत तिलहन मेला सह प्रदर्शनी का आयोजन कृषि धाम मोहनपुरा में चल रहा है, बड़ी संख्या में कृषक शामिल हो रहे है. कृषि वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया जा रहा है.23 से 25 फरवरी तक होने वाले कृषि सम्मेलन का शुभारंभ कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा किया गया. भोपाल, बनारस, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर एवं खंडवा से आए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी दी. तिलहन मेले में कोरोमंडल अंतराष्ट्रीय लिमिटेड के एग्रोनॉमिस्ट भास्कर तिवारी सहित विभिन्न कृषि विशेषज्ञों ने भाग लेकर किसानों को उर्वरक प्रबंधन, कीट नियंत्रण एवं उन्नत बीज चयन के बारे में मार्गदर्शन दिया.
फसलों से जुड़ी समस्याएं रखी
सम्मेलन के दौरान किसानों ने अपनी फसलों से जुड़ी समस्याएं रखी, जिनका वैज्ञानिकों ने समाधान बताया1 प्याज एवं लहसुन पीली पडऩा, नाइट्रोजन, सल्फर या जिंक की कमी, जल भराव एवं थ्रिप्स कीट के कारण पत्तियां पीली होती है. संतुलित उर्वरक एवं जल निकासी आवश्यक है. मसूर में उखटा रोग – फफूंद जनित रोग से बचाव हेतु बीजोपचार , फसल चक्र एवं रोगग्रस्त पौधों को हटाने की सलाह दी गई. सोयाबीन में कीट प्रकोप, तना मक्खी, गर्डल बीटल आदि से बचाव हेतु समय पर कीटनाशक छिडक़ाव एवं फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी गई.
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को यूरिया का अत्यधिक उपयोग कम करने, संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने एवं मृदा परीक्षण के आधार पर खाद उपयोग की सलाह दी. वेटरनरी कॉलेज मऊ के प्रोफेसर मोहब्बत सिंह जमरा ने बकरी पालन को आय का सशक्त साधन बताते हुए नस्ल चयन, टीकाकरण, संतुलित आहार एवं रोग नियंत्रण पर विस्तृत जानकारी दी.कपास की खेती को लेकर किसानों को उन्नत बीज, एकीकृत कीट प्रबंधन एवं उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों से अवगत कराया गया. जिले में संतरे की अधिक आवक को देखते हुए विपणन, ग्रेडिंग एवं प्रसंस्करण की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई.
सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए
सम्मेलन के दूसरे दिन मंगलवार को निमाड़ से आए कलाकारों ने प्रसिद्ध गणगौर नृत्य की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया. उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग सचिन जैन ने कहा कि तीन दिवसीय कृषि सम्मेलन एवं प्रदर्शनी का उद्देश्य किसानों को नवीन तकनीक, योजनाओं एवं वैज्ञानिक पद्धतियों से जोडक़र उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर कृषि वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया.
