वाशिंगटन/नई दिल्ली | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को “बेतुका” और “अमेरिका विरोधी” करार देते हुए वैश्विक व्यापारिक साझीदारों को कड़ी चेतावनी दी है। दरअसल, कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि राष्ट्रपति ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत बिना कांग्रेस की मंजूरी के व्यापक टैरिफ नहीं लगा सकते। इस फैसले के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर साफ़ किया कि जो देश इस कानूनी स्थिति का फायदा उठाकर अमेरिका के साथ “खेल” खेलने या उसे आर्थिक नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेंगे, उन्हें पहले से कहीं अधिक कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
कोर्ट के फैसले से ट्रंप की ‘रिसिप्रोकल’ टैरिफ नीतियों को झटका जरूर लगा है, लेकिन वे झुकने को तैयार नहीं हैं। फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर ट्रंप ने ‘ट्रेड एक्ट’ की धारा 122 का इस्तेमाल करते हुए सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लागू कर दिया, जिसे अगले ही दिन बढ़ाकर 15% कर दिया गया। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके पास व्यापारिक सुरक्षा के लिए अन्य कानूनी विकल्प मौजूद हैं और वे इनका उपयोग अब पहले से “कहीं ज्यादा शक्तिशाली और कठोर” तरीके से करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि अमेरिका को सालों-साल लूटने वाले देशों को अब पहले से सहमत दरों से कहीं अधिक ऊंचे टैरिफ चुकाने होंगे।
ट्रंप के इस कड़े रुख और सुप्रीम कोर्ट के साथ उनके टकराव ने वैश्विक व्यापार जगत में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह “टैरिफ वॉर” नीति उनके दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा मोड़ साबित हो रही है। जहां कुछ समर्थक इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने इसे कूटनीतिक तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया है। ट्रंप के इस फैसले से आने वाले दिनों में वैश्विक सप्लाई चेन और विभिन्न देशों के साथ अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर गहरा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

