नयी दिल्ली, 21 फरवरी (वार्ता) देश में आपदा प्रबंधन नीति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण (डीएमआरआर) में अकादमिक कार्यक्रम शुरु कर, क्षमता निर्माण, नीति अनुसंधान और संचार को बढ़ावा देने के ख्याल से एक महत्वपूर्ण सहयोगात्मक ढांचा स्थापित करने के लिए आपसी सहमति के एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), वैज्ञानिक और नवोन्मेषी अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) और सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) के बीच शनिवार को इस आशय के त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गये।
आधिकारिक सूचना के अनुसार इस समझौते का मकसद शैक्षणिक पहलों, अनुसंधान और सशक्त जन सहभागिता के जरिए आपदा प्रतिरोधी निर्माण के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति को एकीकृत करना है। इससे एनडीएमए के सहयोग से सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर में एसीएसआईआईआर के तहत आपदा प्रबंधन में पीएचडी कार्यक्रम शुरु कर डीएमआरआर में विज्ञान संचार और क्षमता निर्माण पहलों सहित संयुक्त अनुसंधान और नीति का अध्ययन करना है। समझौता एनडीएमए के सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल, एसीएसआईआर के निदेशक प्रोफेसर मनोज कुमार धर तथा डीएमआरआर के डॉ. गीता वानी के मौजूदगी में हुआ।
आपदा प्रबंधन की मजबूती के इस त्रिपक्षीय समझौते में कहा गया है कि गृह मंत्रालय के अधीन आपदा प्रबंधन नीतियों से संबंधित सर्वोच्च निकाय एनडीएमए इसमें रणनीतिक दिशा-निर्देश और विशेषज्ञता प्रदान करेगा जबकि विश्वविद्यालयी शोध की प्रबीणता वाला एसीएसआईआर, अकादमिक कार्यक्रमों और अनुसंधान पहलों का नेतृत्व करेगा। समझौते के तहत सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर अकादमिक कार्यक्रमों की मेजबानी करेगा। सरकार का कहना है कि यह त्रिपक्षीय सहयोग भारत के आपदा प्रबंधन तंत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, विज्ञान संचार और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को समाहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डॉ. असवाल ने इस मौके पर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर नौ सूत्री एजेंडा के अनुरूप, हम आपदा संबंधी अनुसंधान और शैक्षणिक कार्यक्रमों पर परस्पर सहयोग से काम करने वाले शैक्षणिक संस्थानों का एक मजबूत नेटवर्क विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, जोखिम संचार और सामुदायिक संपर्क को बढ़ाने के लिए संचार चैनलों की परिवर्तनकारी क्षमता का पूर्ण उपयोग करना चाहिए। आपदा के बाद व्यवस्थित अध्ययन और दस्तावेज़ीकरण के माध्यम से प्रत्येक आपदा से सीखने का हमारा संकल्प भी उतना ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इस अनुभव से तैयारियों को मजबूत और प्रतिक्रिया तंत्र को परिष्कृत कर सकते हैं। यह समझौता ज्ञापन आपदाओं से जुड़ी जटिल और विकसित होती चुनौतियों का समाधान करने के लिए वैज्ञानिकों और नीति विशेषज्ञों के बीच एक मजबूत सेतु बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
प्रोफेसर धर ने कहा कि एसीएसआईआर में 7,000 से अधिक छात्र नामांकित हैं और यह भारत के शीर्ष अनुसंधान संस्थानों में शुमार है। यह समझौता ज्ञापन छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए आपदा प्रबंधन चुनौतियों के नवीन, अनुसंधान-आधारित समाधान विकसित करने के नए द्वार खोलता है। ”
डॉ. गीता वानी रायसम ने कहा “सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर 15 शोध पत्रिकाएँ प्रकाशित करता है, विज्ञान संचार में राष्ट्रीय पहलों का नेतृत्व करता है और साक्ष्य-आधारित नीति अनुसंधान से जुड़ा है। एनडीएमए और एसीएसआईआर के साथ साझेदारी हमें आपदा प्रबंधन के लिए नीति और जन जागरूकता ढाँचों में वैज्ञानिक ज्ञान को एकीकृत करने में सक्षम बनाएगी। ”
