छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव: एक-एक सीट पर भाजपा–कांग्रेस की नजर, सरगुजा-बस्तर समीकरण बनेगा निर्णायक

रायपुर, 21 फरवरी (वार्ता) छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो रिक्त सीटों के लिए चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 26 फरवरी को अधिसूचना जारी होने के साथ नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ होगी, जबकि पांच मार्च तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। विधानसभा की मौजूदा संख्या-स्थिति को देखते हुए एक सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाने की प्रबल संभावना है, हालांकि दोनों दल अंतिम निर्णय के लिए अपने-अपने प्रस्ताव केंद्रीय नेतृत्व को भेजेंगे।
कांग्रेस खेमे में संभावित उम्मीदवारों को लेकर गहन विचार-विमर्श जारी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश नेतृत्व से जुड़े कई वरिष्ठ चेहरे चर्चा में हैं। इनमें पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव के नाम प्रमुख रूप से लिए जा रहे हैं। संगठनात्मक अनुभव, आदिवासी नेतृत्व और क्षेत्रीय संतुलन जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर पार्टी निर्णय ले सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार प्रदेश नेतृत्व को प्राथमिकता देने की संभावना अधिक है।
भाजपा परंपरागत रूप से राज्यसभा के लिए स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देती रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार भी छत्तीसगढ़ से ही किसी ऐसे चेहरे को आगे लाया जा सकता है, जिसकी जमीनी पहचान विशेष रूप से किसान या क्षेत्रीय मुद्दों से जुड़ी रही हो।
बताया जा रहा है कि सरगुजा और बस्तर संभाग के सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। प्रदेश नेतृत्व संभावित नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजेगा, जहां अंतिम मुहर लगेगी। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भाजपा एक बार फिर अप्रत्याशित नाम घोषित कर सकती है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। वर्तमान में भाजपा के 54, कांग्रेस के 35 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के एक विधायक हैं। दो सीटों पर चुनाव होना है। राज्यसभा चुनाव के तय फार्मूले के अनुसार जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को जीत सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम 31 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी। संख्या बल को देखते हुए दोनों प्रमुख दल एक-एक सीट निकालने की स्थिति में दिखाई देते हैं।
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने राज्यसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि प्रदेश की राजनीति में सरगुजा और बस्तर की भूमिका निर्णायक रही है। उनके अनुसार इन दोनों क्षेत्रों का समर्थन जिस दल को मिलता है, सत्ता का समीकरण उसी के पक्ष में जाता है। हालांकि उन्होंने राज्यसभा को लेकर प्रत्यक्ष दावेदारी नहीं जताई।
छत्तीसगढ़ से राज्यसभा में वर्तमान में पांच सदस्य हैं। इनमें से दो सदस्यों का कार्यकाल नौ अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें कांग्रेस की फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी शामिल हैं।
कांग्रेस के राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन का कार्यकाल 2028 तक है, जबकि भाजपा से देवेन्द्र प्रताप सिंह 2030 तक सदस्य बने रहेंगे।
छत्तीसगढ़ में होने वाला यह चुनाव भले ही संख्या के लिहाज से स्पष्ट दिख रहा हो, लेकिन उम्मीदवार चयन को लेकर दोनों दलों में रणनीतिक मंथन तेज है। सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और भविष्य की राजनीतिक रणनीति—इन सभी पहलुओं को साधते हुए अंतिम नामों की घोषणा आने वाले दिनों में तस्वीर साफ करेगी।

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