मंदिरों के फूलों से महकेगी होली

जबलपुर: स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान 2025-26 के अंतर्गत नगर निगम ने स्वच्छता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। ‘वोकल फॉर लोकल के मंत्र को साकार करते हुए निगम अब मंदिरों से निकलने वाले श्रद्धा के फूलों (वेस्ट फ्लॉवर्स) को फेंकने के बजाय उनसे शुद्ध और स्वदेशी गुलाल तैयार कर रहा है। निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने बताया कि
इस बार की होली में रासायनिक रंगों के बजाय, शहरवासी मंदिरों के गुलाब और गेंदे से बने प्राकृतिक गुलाल से सराबोर होंगे। निगमायुक्त के अनुसार इस ‘वेस्ट टू वेल्थ मॉडल से स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की रैंकिंग में नगर निगम को मजबूती मिलेगी।
स्वदेशी प्लांट का निरीक्षण
निगमायुक्त ने बल्देबाग स्थित स्वदेशी प्लांट का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने फूलों से गुलाल बनाने की प्रक्रिया का अवलोकन किया और टीम को निर्देश दिए कि आगामी होली के त्योहार को देखते हुए तैयारियों में तेजी लाई जाए। उन्होंने जोर दिया कि गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न हो ताकि नागरिकों को बेहतरीन और त्वचा के लिए सुरक्षित गुलाल मिल सके। इस दौरान निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने बताया कि शहर के विभिन्न मंदिरों से प्रतिदिन एकत्रित होने वाले फूलों का सदुपयोग हो रहा है।
रसायनों से मुक्त, पूरी तरह से प्राकृतिक और हर्बल गुलाल का निर्माण किया जा रहा है। निगम की इस पहल से स्थानीय स्तर पर लोगों को काम मिल रहा है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक प्रयास है।

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