वाशिंगटन डीसी | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नवगठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में वैश्विक राजनीति को गर्मा दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से चीन और रूस को इस बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपने मधुर संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि वे अप्रैल में चीन की यात्रा पर जाएंगे। वैश्विक विवादों को सुलझाने के अपने मिशन को गति देने के लिए ट्रंप ने इस बोर्ड को 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता देने की घोषणा भी की है। बोर्ड का प्रारंभिक लक्ष्य गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण और वहां शांति बहाली की कोशिशों पर केंद्रित रहेगा।
बैठक के दौरान ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ अब संयुक्त राष्ट्र (UN) की कार्यप्रणाली पर नजर रखेगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह ठीक से काम कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र की सुविधाओं और वित्तीय स्थिरता को बेहतर बनाने में मदद करेगा, लेकिन इसके सफल होने के लिए बोर्ड की निगरानी जरूरी है। इस “फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव बोर्ड” की कमान जेरेड कुशनर, मार्को रुबियो और पूर्व ब्रिटिश पीएम टोनी ब्लेयर जैसे दिग्गजों के हाथों में है। ट्रंप का यह कदम अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका के दबदबे को एक नई दिशा देने की कोशिश माना जा रहा है।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ की इस पहली बैठक में 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य जैसे फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन इसमें शामिल नहीं हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूरोपीय संघ ने भी फिलहाल इस बोर्ड से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है। भारत को भी इस शक्तिशाली बोर्ड में शामिल होने का औपचारिक न्योता मिला है, लेकिन नई दिल्ली ने अभी तक अपना अंतिम फैसला साझा नहीं किया है। ट्रंप का यह नया अंतरराष्ट्रीय मंच आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति और विवादों को सुलझाने के मौजूदा तरीकों को कितनी चुनौती देगा, इस पर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं।

