ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
कूनो के जंगल में मंगल की तैयारी है। भारत के जंगलों में अंधाधुंध शिकार और पर्यावरण असंतुलन के चलते चीते दसियों साल पहले अपना अस्तित्व खो चुके थे और 1952 में ही इन्हें विलुप्त घोषित कर दिया गया था लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने कूनो के नेशनल पार्क में सितंबर 2022 में जब चीतों के पुनर्वास और बसाहट का प्रोजेक्ट शुरू किया तो देश के मानचित्र पर अनपहचाना सा कूनो लगभग रोज ही देश विदेश के अखबारों में सुर्खियां बटोरने लगा। इन दिनों कूनो की आबोहवा में एक बार फिर से गर्मजोशी देखी जा रही है।
संभावना है कि 28 फरवरी को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू और बोत्सवाना के राष्ट्रपति डूमा बोका यहां तशरीफ ला सकते हैं। दरअसल राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू हाल ही में जब बोत्सवाना गईं थीं तो बोत्सवाना के राष्ट्रपति ने उन्हें आठ चीते भेंट किए थे। इनकी बसाहट के लिए कूनो सेंचुरी को ही चयनित किया गया है। हालांकि अभी तक दोनों में से एक भी महामहिम का आधिकारिक प्रोग्राम नहीं आया है लेकिन प्रशासन और कूनो प्रबंधन अपने तईं इंतजाम मुकम्मल करने में जुटा है।
कूनो के जंगल में वीवीआईपी के लिए पांच हेलीपेड बनाकर तैयार कर दिए गए हैं। 21 फरवरी को खुद सीएम मोहन यादव यहां आकर तैयारियां देखेंगे। हाई प्रोफाइल अतिथियों के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से खुफिया एजेंसियों को भी एक्टिव और अलर्ट रखा गया है। खुशी की यह कि आज बुधवार को ही कूनो सेंचुरी में गामिनी चीता ने तीन शावकों को जन्म दिया है। इन शावकों और बोत्सवाना से आ रहे आठ चीतों को भी जोड़ दें तो भारत में चीतों की कुल तादाद 46 हो जाएगी। कह सकते हैं कि बीमारी व आपसी संघर्ष में कुछ चीतों की मौत और सेंचुरी प्रबंधन पर आए दिन उठने वाले तमाम सवालों के बावजूद चीता प्रोजेक्ट सही दिशा में रन कर रहा है।
टैलेंट हंट क्लीयर करने के बाद ही कांग्रेस में मिलेंगे पद
कांग्रेस में बड़े नेताओं की सिफारिशों और धनबल, बाहुबल के जोर पर नियुक्तियों की परिपाटी रोकने के लिए राहुल गांधी ने टैलेंट हंट की शुरुआत की थी। कांग्रेस के मुख्य संगठन से लेकर आनुषांगिक संगठनों में टैलेंट हंट के जरिए ही प्रवक्ता और पैनलिस्ट नियुक्त करने की परंपरा अब एआई के दौर में प्रवेश कर गई है। फिलवक्त सूबाई कांग्रेस में टैलेंट हंट प्रोग्राम चल रहा है। पुराने सभी प्रवक्ता अपनी जिम्मेदारियों से रुखसत कर दिए गए हैं। टैलेंट हंट के जरिए नई राजनीतिक प्रतिभाओं की तलाश की जा रही है। संवाद कौशल, सामयिक विषयों पर पकड़, विरोधियों से वाद विवाद में पार्टी के पक्ष को रखने में महारथ के साथ इस बार आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानि एआई की समझ पर भी जोर दिया जा रहा है।
ग्वालियर से तमाम कांग्रेस नेता प्रदेश प्रवक्ता बनने की दौड़ में हैं। इनमें वे चेहरे भी हैं जो अभी तलक संभागीय और जिला प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। प्रदेश स्तर पर बीस, संभाग व जिले में दो दो प्रवक्ता बनने हैं। चूंकि आवेदन भेजने की आख़िरी तारीख 28 फरवरी है, लिहाजा दावेदारों को खुद को निखारने के साथ जूरी के समक्ष खुद को साबित करने के लिए पर्याप्त वक्त मिल गया है। ग्वालियर की बात करें तो यहां से अभी तक धर्मेंद्र शर्मा, राम पांडे, आरपी सिंह, एड. अनुराधा सिंह जैसे चेहरे प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। भिंड से स्वदेश आकाश और शिवपुरी से अजीत भदौरिया को भी प्रदेश तक पहुंचने का मौका मिला। ग्वालियर में जिला प्रवक्ता के रूप में चार दशकों का सबसे लंबा कार्यकाल राजकुमार शर्मा का रहा। वे तत्कालीन नेतृत्व से रूठ गए थे, नए जिला अध्यक्ष सुरेंद्र यादव उन्हें वापस मुख्य धारा में ले आए हैं। अब देखना है कि टैलेंट हंट प्रोग्राम में पुराने रिपीट होते हैं या फिर पार्टी नए चेहरों पर ऐतबार करेगी।
अब 22 फरवरी शांति से गुजारने की चुनौती
यहां के हाइकोर्ट परिसर में अम्बेडकर प्रतिमा लगे, अथवा न लगे, इस मुद्दे पर दो विचारधाराओं के टकराव ने अमनपसंद मिजाज वाले ग्वालियर शहर की फ़िजाँ में पिछले कुछ महीने से जातीय तनाव को सुर्ख कर रखा है। तनाव को हवा देने की दोनों तरफ से कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही लेकिन प्रशासन और पुलिस की पुरजोर कोशिश है कि यहां दो अप्रैल जैसे हालात नहीं बनें। बहरहाल, अम्बेडकर प्रतिमा से शुरू हुआ विवाद यूजीसी के ताजा मुद्दे पर आकर टिक गया है। प्रशासन दोनों तरफ वालों को ऐसे किसी भी कार्यक्रम की इजाजत नहीं दे रहा है जो आग में घी का काम करे लेकिन कुछेक संगठनों ने 22 फरवरी को ग्वालियर में सामाजिक विचार संगोष्ठी रखकर प्रशासन के समक्ष नई चुनौती पैदा कर दी है।
अंबेडकर प्रतिमा, आरक्षण, यूजीसी जैसे तमाम मुद्दों पर अपने बयानों के कारण चर्चा और विवादों में रहे एस फॉर संगठन के आनंद स्वरूप स्वामी इस विचार संगोष्ठी में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए ग्वालियर चंबल अंचल के तमाम जिलों, कस्बों में जाकर न्यौता दे रहे हैं। सन 90 में आरक्षण के विरोध में आत्मदाह करने वाले अखिलेश पांडे जैसे पुराने चेहरे भी इस मुहिम में शामिल हैं। यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर आठ मार्च को दिल्ली में हो रहे महाआंदोलन में भी ग्वालियर से बड़ी भागीदारी की तैयारी है। उधर अम्बेडकर प्रतिमा समर्थकों के अभियान की कमान भीम आर्मी के दामोदर यादव संभाल रहे हैं। लाखन सिंह बौद्ध भी एक्टिव हैं। प्रशासन और पुलिस की एक एक एक्टिविटीज पर नजर है।
