जबलपुर: जिले के सरकारी और अनुबंधित गोदामों में लगभग 8 लाख क्विंटल चावल जमा है, जिसमें बड़ी मात्रा में निम्न गुणवत्ता वाला और पुराना चावल शामिल होने की खबर सामने आई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राइस मिलों द्वारा नई धान उठाई जाती है, लेकिन इसके बदले पुराना चावल गोदामों में जमा कर दिया जाता है। अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अगर प्रदेश स्तरीय संयुक्त जांच होती है तो जिले में चल रहे कथित खेल का सच सामने आ सकता है और भविष्य में गुणवत्ता नियंत्रण को सुनिश्चित किया जा सकता है।
रिपोर्ट में दिखाया जा रहा नया चावल
सूत्रों ने बताया कि नागरिक आपूर्ति निगम के अनुबंध में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि मिलर केवल वही धान उठा सकते हैं जिसका चावल जमा किया जाएगा। पुराने चावल या बाजार से खरीदे गए चावल को जमा करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। जानकारी के अनुसार गुणवत्ता जांच के लिए निगम अधिकृत कंपनी को एज टेस्ट करने का निर्देश देती है। इसके लिए विशेष केमिकल उपलब्ध कराया जाता है, जिससे चावल के रंग से उसका नया या पुराना होना तय किया जाता है। नया चावल एफेरेडो ग्रीन रंग दिखाता है, और पुराना चावल रंग नहीं बदलता है।
अधिकांश गोदामों में नहीं हो रही नियमित सैंपलिंग
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जांच में पता चला कि एज टेस्ट और अन्य गुणवत्ता परीक्षण सही ढंग से नहीं किए जा रहे हैं। अधिकांश गोदामों में नियमित सैंपलिंग तक नहीं की जा रही है, केवल कुछ जगहों पर खानापूर्ति के लिए सैंपल लिए जा रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच से जिले में जमा 70 प्रतिशत से अधिक चावल पुराना होने की संभावना जताई जा रही है
