
जबलपुर। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने भोजशाला संबंधित विवाद याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई इंदौर खंडपीठ द्वारा किये जाने के आदेश जारी किये है। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा है कि विवादित ढांचा धार जिले में स्थित है,जो इंदौर हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। संबंधित पक्षकार भी उसी क्षेत्र के है,इसलिए संबंधित याचिकाओं की सुनवाई इंदौर बेंच द्वारा की जाये। इस अलावा जबलपुर मुख्यपीठ में दायर अपील भी सुनवाई के लिए इंदौर स्थानांतरित करने के आदेश जारी किये है। सभी याचिकाओं पर अगली सुनवाई 23 फरवरी को निर्धारित की गयी है। गौरतलब है कि भोजशाला विवाद संबंधित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 11 मार्च 2024 को पारित आदेश में भोजशाला स्थित सुरक्षित ऐतिहासिक जगह का नए तरीकों से इस्तेमाल करके की जांच और सर्वे करने का निर्देश आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया दिया था, जो एक सुरक्षित ऐतिहासिक स्मारक है। एएसई की पांच सदस्यीय सिनियर एक्सपर्ट अधिकारियो की कमेटी ने परिसर का सर्वे कर फोटोग्राफी की थी। बंद और सील किए गए कमरों को खोला ताकि वहां मिली कलाकृतियों और स्ट्रक्चरल चीज़ों की एक्सपर्ट टीम साइंटिफिक तरीके से जांच कर सके। इसके बाद एक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट जमा की गई। सर्वोच्च न्यायालय ने 1 अप्रैल, 2024 को निर्देश दिया कि सर्वे के नतीजे पर कोई कार्रवाई नहीं की जाये। किसी प्रकार की कोई खुदाई नहीं की जानी चाहिए जिससे साइट का नेचर बदल जाए।
इंदौर खंडपीठ ने विगत 16 फरवरी को भोजशाला संबंधित सभी याचिकाओं को सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत किये जाने के आदेश जारी किये थे। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी धार बनाम हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य के मामले में 22 अप्रैल 2026 को आदेश में निर्देश जारी किये है कि इंदौर खंडपीठ के समक्ष लंबित रिट पिटीशन नंबर 10497/2022 की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस क्ीद अध्यक्षता वाली या हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली युगलपीठ तीन हफ़्ते के अंदर सुनवाई करें। युगलपीठ ओपन कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट खोले और दोनों पक्षों को उसकी कॉपी दे। अगर रिपोर्ट का कोई हिस्सा कॉपी नहीं किया जा सकता है, तो पार्टियों को एक्सपर्ट और उनके वकील की मौजूदगी में रिपोर्ट के उस हिस्से को देखने की इजाज़त दी जा सकती है। संबंधित पक्षकार को अपनी-अपनी आपत्तियां, राय, सुझाव और सिफारिशें जमा करने के लिए दो हफ़्ते का समय दिया जा सकता है। इसके बाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच केस को फाइनल हियरिंग में लेकर भी पक्षकरों की सभी दलीलों पर ठीक से विचार करें। जब तक रिट पिटीशन पर आखिरी फैसला नहीं हो जाता है भोजशाला सरस्वती मंदिर-कम-मौलाना कमाल मौला मस्जिद के कैरेक्टर में बदलाव के मामले में यथास्थिति बनाए रखेंगी। इस दौरान समस्त पक्षकार आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल द्वारा जारी 07.04.2003 के आदेश का पालन करेंगी।
आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल द्वारा जारी किए गए 07.04.2003 के ऑर्डर को भी हाई कोर्ट में एक रिट पिटीशन में अलग से चुनौती दी गई थी। जिसे एकलपीठ ने खारिज कर दिया था। एकलपीठ द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर की गयी अपील लंबित है। जिसके सुनवाई भी संबंधित याचिकाओं के साथ की जाये। इंदौर खंडपीठ ने उक्त आदेश के साथ सभी याचिकाओं को सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश जारी किये थे।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल द्वारा जारी आदेश के खिलाफ दायर अपील के साथ संबंधित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए उक्त आदेश जारी किये।
