गुना:जिले में इन दिनों जनस्वास्थ्य से जुड़े दो बेहद संवेदनशील मामले चर्चा का विषय बने हुए हैं। एक तरफ जहां शहर के होटलों और बाजारों में खुलेआम बिक रही दूषित खाद्य सामग्री और सड़ी गली सब्जियां लोगों को बीमार कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर गरीबों को उनके घर के पास स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए बनाई गई मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक’ योजना दम तोड़ रही है।
करोड़ों रुपये की लागत से बने आधुनिक भवन आज ताले में बंद हैं, जबकि शहर का गरीब तबका इलाज के लिए जिला अस्पताल की लंबी कतारों में धक्के खाने को मजबूर है। गुना शहर के मुख्य बाजारों से लेकर गलियों तक, होटलों और रेस्टोरेंट्स की स्थिति चिंताजनक है।
नियमों को ताक पर रखकर संचालक काउंटर पर खुले में समोसे, कचौड़ी और जलेबी जैसे खाद्य पदार्थ बेच रहे हैं। धूल, धुएं और मक्खियों के बीच रखे ये पदार्थ सीधे तौर पर मौसमी बीमारियों को निमंत्रण दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इस बात से भली-भांति परिचित है कि दूषित खान-पान ही अधिकांश पेट संबंधी बीमारियों की जड़ है, इसके बावजूद धरातल पर कोई ठोस अंकुश नहीं लग पा रहा है। हालांकि, प्रशासन ‘मिलावट से मुक्ति’ अभियान के तहत सैंपलिंग की खानापूर्ति जरूर कर रहा है, लेकिन इसका प्रभाव शून्य नजर आता है। व्यापारियों में डर न होने का सबसे बड़ा कारण लैब रिपोर्ट आने में होने वाली अत्यधिक देरी है। जब तक रिपोर्ट आती है, तब तक दुकानदार हजारों लोगों को दूषित सामग्री खिला चुका होता है। इसके बाद कानूनी प्रक्रियाओं में ‘संदेह का लाभ’ मिलना विक्रेताओं के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। यही कारण है कि कार्रवाई के बावजूद मिलावटखोरी और लापरवाही का सिलसिला थम नहीं रहा है।
मंडियों में सडी सब्जियां और आरओ प्लांटों की मनमानी खाद्य सुरक्षा का संकट केवल होटलों तक सीमित नहीं है। शहर की सब्जी मंडियों में सड़ी-गली और घटिया गुणवत्ता वाली सब्जियां कम दाम का लालच देकर बेची जा रही हैं। मध्यम और निम्न वर्ग के लोग अनजाने में इन जहरीली सब्जियों का सेवन कर अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसी कड़ी में अब गर्मियों का सीजन शुरू होते ही ‘पानी के खेल’ का कारोबार भी चमक उठा है। शहर में कुकुरमुत्ते की तरह उगे निजी आरओ प्लांट बिना किसी मानक के पानी बेच रहे हैं। शासन के नियमानुसार, आरओ प्लांट संचालित करने से पहले सीएमएचओ कार्यालय के खाद्य एवं औषधि विभाग से ऑनलाइन पंजीयन और मौके पर जांच अनिवार्य है। लेकिन गुना में न तो संचालक इन नियमों का पालन कर रहे हैं और न ही विभाग उनकी निगरानी कर रहा है। जिला अस्पताल के डरावने आंकड़े बताते हैं कि पेट दर्द की शिकायत लेकर आने वाले हर 10 में से 3 मरीजों को पथरी की समस्या निकल रही है, जिसका सीधा संबंध अमानक और दूषित पानी से है।
