भारत के जेन-जी युवाओं का म्यूचुअल फंड और क्रिप्टो से मोहभंग, निवेश के लिए 62 प्रतिशत युवाओं की पहली पसंद बना सोना, आर्थिक सुरक्षा के लिए बदला नजरिया

नई दिल्ली | भारत की युवा पीढ़ी यानी जेन-जी और मिलेनियल्स के बीच निवेश के पारंपरिक तरीकों के प्रति लगाव एक बार फिर लौट रहा है। एक हालिया सर्वे में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 18 से 39 वर्ष की आयु के लगभग 62 प्रतिशत युवा अब म्यूचुअल फंड और क्रिप्टो जैसे आधुनिक विकल्पों की तुलना में सोने को अधिक सुरक्षित मान रहे हैं। आर्थिक अनिश्चितता और बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच, करीब 5,000 युवाओं पर किए गए इस सर्वे में फिक्स्ड डिपॉजिट (13%) और शेयर बाजार (6.6%) जैसे विकल्प काफी पीछे छूट गए हैं, जबकि क्रिप्टो को महज 1.9 प्रतिशत युवाओं ने पसंद किया है।

आजकल के युवाओं में सोना खरीदने का तरीका भी बदल रहा है; वे अब एकमुश्त बड़ी खरीदारी के बजाय 5 ग्राम से कम वजन के सोने में नियमित निवेश कर रहे हैं। सर्वे के अनुसार, लगभग दो-तिहाई युवा सोना खरीदने का फैसला पूरी तरह अपनी मर्जी से लेते हैं, जो उनकी बढ़ती वित्तीय आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। दिलचस्प तथ्य यह है कि करीब 24.3 प्रतिशत युवाओं ने अपना पहला वेतन मिलते ही सबसे पहले सोने में निवेश किया। अब युवा इसे केवल शादी-ब्याह के आभूषण के तौर पर नहीं, बल्कि भविष्य की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले एक ठोस आधार के रूप में देख रहे हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता के दौर में करीब 65 प्रतिशत युवाओं का दृढ़ विश्वास है कि सोना ही सबसे भरोसेमंद संपत्ति है। जोखिम भरे डिजिटल एसेट्स से मोहभंग होने के बाद युवा अब ‘लचीली बचत’ (Flexible Savings) की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह नया रुझान संकेत देता है कि भारत का युवा वर्ग अपनी मेहनत की कमाई को लेकर अधिक जागरूक हो चुका है और निवेश के लिए बाजार के आंकड़ों और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले समय में डिजिटल गोल्ड और फिजिकल गोल्ड दोनों की मांग में युवाओं की वजह से और अधिक वृद्धि होने की प्रबल संभावना है।

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