जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट में सोमवार को राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस के कारण कोई भी वकील पैरवी करने नहीं पहुंचा। जिस कारण जस्टिस डीडी बंसल की एकलपीठ के समक्ष बुजुर्ग कर्मचारी व दिवंगत कर्मियों की विधवाएं स्वयं पेश हो गईं। उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन और उनके हक के भुगतान में विलंब की जानकारी दी। न्यायालय ने इस जानकारी को अभिलेख पर लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए नगर निगम जबलपुर के आयुक्त को परिपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये है।
इसके साथ ही न्यायालय ने 23 फरवरी को व्यक्तिगत उपस्थिति की व्यवस्था दी है। एकलपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि 14 अगस्त 2024 के मूल आदेश का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो अवमानना प्रकरण में अधिकारी की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी। यह पूरा मामला नगर निगम के उन पूर्व कर्मचारियों से जुड़ा है जो पिछले चार से छह वर्षों से अपनी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि नगर निगम ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के खिलाफ रिट अपील और फिर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, लेकिन दोनों ही जगहों से निगम की याचिकाएं निरस्त कर दी गईं। वर्तमान में निगम की एक पुनर्विचार याचिका हाईकोर्ट में लंबित है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान वकीलों की हड़ताल के चलते बुजुर्ग कर्मचारी और दिवंगत कर्मचारियों की विधवाएं स्वयं कोर्ट में पेश हुईं। उन्होंने रोते हुए अपनी पीड़ा सुनाई कि कई साथियों की मृत्यु हो चुकी है और वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि निगम प्रशासन वकीलों और अदालती कार्रवाइयों पर लाखों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों का भुगतान नहीं कर रहा। जिसके बाद न्यायालय ने मानवीय पक्ष को गंभीरता से लेते हुए उक्त निर्देश जारी किये।
