नई दिल्ली | भारतीय शेयर बाजार के लिए आगामी सप्ताह काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजों का सीजन अब समाप्त हो चुका है। विश्लेषकों के अनुसार, अब बाजार की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक संकेतों, विशेषकर अमेरिका के श्रम बल आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर रुख से तय होगी। इसके अलावा, निवेशकों की नजर भारत के थोक मुद्रास्फीति (WPI), विनिर्माण और सेवा पीएमआई (PMI) जैसे प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नीतिगत स्पष्टता नहीं मिलती, बाजार एक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है।
पिछले सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बदलावों को लेकर उपजी चिंताएं रहीं। इस वजह से सूचना प्रौद्योगिकी (IT) शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी और मेटल सेक्टर को वर्तमान में बाहरी और संरचनात्मक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में निवेशक बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता खपत आधारित क्षेत्रों की ओर रुख कर सकते हैं। विदेशी निवेशकों (FIIs) की गतिविधियां और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी बाजार के मूड को प्रभावित करेगी।
बाजार की धारणा पर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का साया भी मंडरा रहा है। अमेरिका के रोजगार आंकड़ों ने भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कम कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में सतर्कता देखी जा रही है। घरेलू मोर्चे पर, शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 90.66 पर बंद हुआ। रेलिगेयर ब्रोकिंग के अनुसार, हालांकि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से बाजार को कुछ सहारा मिला है, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार और बैंक कर्ज वृद्धि जैसे आंकड़े आने वाले दिनों में जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित करेंगे। निवेशकों को इस अस्थिरता के बीच सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

