सतना:कृषि संकाय के तत्वाधान में कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कृषि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. डी.पी. राय, संगोष्ठी संयोजक प्रो. सुधाकर प्रसाद मिश्रा तथा ग्राम टेढ़ी पतवनिया के सरपंच नरेन्द्र प्रताप सिंह उपस्थित रहे।संगोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को समसामयिक खेती, उन्नत कृषि तकनीकों एवं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ. पवन
सिरोठिया ने कृषक संगोष्ठी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक फसल सीजन में उन्नत बीज, उर्वरक एवं कीटनाशकों के वैज्ञानिक उपयोग से उत्पादन एवं आय में वृद्धि संभव है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों से निरंतर संपर्क बनाए रखें और उनके मार्गदर्शन में उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाएं।
इस अवसर पर सरपंच नरेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने ग्राम पंचायत क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा तिल, अलसी एवं अन्य फसलों के उन्नत बीज, उर्वरक एवं कीटनाशकों की उपलब्धता तथा अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को दिए जा रहे सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि इससे किसानों को नवीन तकनीकों को व्यवहारिक रूप में समझने का अवसर मिलता है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. डी.पी. राय ने जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक असंतुलन, पक्षियों की घटती संख्या तथा बदलते मौसम चक्र कृषि के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे संभावित जोखिमों को कम किया जा सके और कृषि को स्थायी आय का साधन बनाया जा सके।
संगोष्ठी में लगभग 50 कृषकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय उपस्थिति रही।कार्यक्रम का संचालन डॉ. पवन सिरोठिया ने किया। संगोष्ठी संयोजन एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सुधाकर प्रसाद मिश्रा द्वारा किया गया। उन्होंने संगोष्ठी के मूल उद्देश्यों—किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ना एवं विश्वविद्यालय–कृषक संवाद को सशक्त बनाना—पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. वाई.के. सिंह , नरेन्द्र सिंह पाल, देव, अमर सहित अन्य गणमान्य किसान, कृषि संकाय के प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
