
जबलपुर। हाईकोर्ट ने विवादित जमीन की खरीद.फरोख्त के मामले में बनाए आरोपी जबलपुर निवासी राजेन्द्र कुमार जैन को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस संदीप एन भट्ट की एकलपीठ ने कहा कि मामले के रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि आवेदक ने मूल शिकायतकर्ता द्वारा 25 नवंबर 2014 को पॉवर ऑफ अटॉर्नी रद्द किए जाने के बाद विवादित संपत्ति खरीदी थी। यह पूरा लेन-देन नगद में हुआ था। यद्यपि एफआईआर दर्ज करने में 10 वर्ष से अधिक की देरी हुई है, लेकिन इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आवेदक इस लेन-देन का लाभार्थी है और प्रथम दृष्टया आवेदक के विरुद्ध पर्याप्त सबूत उपलब्ध हैं, उसे राहत नहीं दी जा सकती। पुलिस अधीक्षक ने आवेदक के खिलाफ पांच हजार रुपए रुपये का इनाम भी घोषित किया है और वह तब से फरार है।
प्रकरण के अनुसार शिकायतकर्ता पुना कली चौरसिया ने मामले के सह-आरोपी उजयार सिंह लोधी के पक्ष में 2 सितंबर 2014 को एक पॉवर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित की थी। यह पावर ऑफ अटॉर्नी 25 नवंबर 2014 को रद्द कर दी गई थी। इसके बावजूद उजयार सिंह ने आवेदक राजेन्द्र जैन को यह जमीन बेच दी। आवेदक के खिलाफ संजीवनी नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। आवेदक की ओर से दलील दी गई कि 10 साल बाद एफआईआर दर्ज कराई गई है। आवेदक को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। यह भी निवेदन किया जाता है कि इस मामले में मुख्य आरोपी उजियार सिंह है, जिसने पॉवर ऑफ अटॉर्नी रद्द होने के बाद संपत्ति बेच दी है। शासन की ओर से तर्क दिया गया कि आवेदक को इसकी जानकारी थी और उसी की सहायता से दस्तावेज तैयार किए गए थे। आरोपी दिए गए पते पर नहीं मिल रहा है और फरार है। उसका मोबाइल भी नहीं लग रहा है।
