
परासिया। जिले के चर्चित कफ सिरप कांड में मेडिकल विशेषज्ञों की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हाल ही में प्राप्त विसरा रिपोर्ट में कोल्डरिप कफ सिरप के सैंपल में डीईजी (डायएथिलीन ग्लाइकोल) पाए जाने की पुष्टि हुई है, जिसके बाद जांच एजेंसियां और अधिक सक्रिय हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में जिन लोगों की भूमिका सामने आई थी, उनके अलावा अब निर्माण, सप्लाई और वितरण श्रृंखला से जुड़े अन्य व्यक्तियों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। मेडिकल बोर्ड की विस्तृत रिपोर्ट में यदि लापरवाही या मिलावट की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई संभव है।
पुलिस प्रशासन ने बताया कि विसरा रिपोर्ट के आधार पर प्रकरण में धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं। साथ ही, औषधि विभाग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा दस्तावेजों और लाइसेंस संबंधी रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि डीईजी एक जहरीला रसायन है, जिसका सेवन स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकता है। इस खुलासे के बाद क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति है और पीड़ित परिवारों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जांच जारी है और मेडिकल विशेषज्ञों की अंतिम रिपोर्ट के बाद मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
मामले को लेकर जब एसआईटी प्रमुख जितेंद्र सिंह जाट से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि लंबी जांच पड़ताल के बाद आई बिसरा रिपोर्ट आई है जिसमें कोल्डड्रीप सीरप में डीईजी की अधिक मात्रा पाई गई है, जिससे बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। वही मेडिकल विशेषज्ञ की रिपोर्ट मांगी गई है जिसके आने के बाद जो गाइड लाइन आएगी, उसके बाद आने की कार्यवाही की जावेगी।
पीड़ित परिवार ने जताया पुलिस कार्यवाही पर भरोसा
परासिया पुलिस ने जहरीले कप सीरप कांड में अब तक नौ आरोपियों के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध किया है जो की बीते 5 माह से सलाखों के पीछे बंद है। जहरीले सीरप से जिले में 22 मासूम बच्चे की मृत्यु हुई है। पीड़ित परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें पुलिस कार्रवाई में पूरा भरोसा है न्यायालय का जो भी फैसला आएगा उसे भी स्वीकार करेंगे। सनद रहे कि कुछ दिनों पुर्व पुलिस की कार्यवाही को लेकर सवाल खड़े किए गए थे।
