
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (वार्ता) भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (इन्सा) और राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-निस्पर) ने विज्ञान संचार और साक्ष्य-आधारित विज्ञान नीति अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता-ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है।
सीएसआईआर-निस्पर की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने बुधवार को कहा कि यह साझेदारी दोनों संस्थानों को विज्ञान संचार, नीति अनुसंधान और शैक्षणिक सहयोग के क्षेत्र में अपनी-अपनी क्षमताओं का लाभ उठाने में सक्षम बनाएगी। इस सहयोग से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) नीति अनुसंधान में सार्थक प्रभाव पैदा करने में मदद मिल सकेगी।
इन्सा के उपाध्यक्ष (नीति) प्रोफेसर अनुराग अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को एक सतत और भविष्य के लिए तैयार विज्ञान एवं नवाचार तंत्र की ओर ले जाने के लिए प्रभावी नीतियों के निर्माण की जरूरत है।
इन्सा के अध्यक्ष प्रोफेसर शेखर सी. मांडे ने दोनों संस्थानों की साझा विरासत का उल्लेख करते हुए इस सहयोग को तीव्र वैज्ञानिक और तकनीकी परिवर्तन के इस युग में विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भी इस बात पर जोर दिया कि मनुष्य और समाज के कल्याण के लिए विज्ञान-प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) का विकास आवश्यक है और एसटीआई के विकास के लिए मजबूत नीतिगत आधार की जरूरत है।
नीति आयोग के डॉ. वी. के. सारस्वत ने इस साझेदारी के लिए दोनों संस्थानों को बधाई दी। उन्होंने ऐसे नीतिगत ढांचे के महत्व पर जोर दिया जो विघटनकारी तकनीकों को उत्तरदायी और मानव-केंद्रित बनाने में मदद करता हो। उन्होंने नीतियों की प्रभावशीलता का आकलन करने और कार्यान्वयन तंत्र को मजबूत करने के लिए पायलट अध्ययन , डिजिटल ट्विन्स और इसी तरह के अन्य उपकरणों की भूमिका को भी रेखांकित किया।
इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य सहयोगात्मक नीति अनुसंधान अध्ययन को बढ़ावा देना, उनका संयुक्त प्रकाशन करना, पायलट परियोजनाएं चलान, क्षमता निर्माण पहल करना, संपर्क कार्यक्रम चलाना और हितधारक परामर्श को बढ़ावा देना है। यह भारत के एसटीआई नीति तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकारी संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, थिंक टैंक, शोधकर्ताओं और युवा विद्वानों को भी एक साथ लाने और उन्हें मंच प्रदान करने में मदद करेगा।
