इंदौर:स्वच्छता में नंबर 1 बनने वाला इंदौर अब शराबखोरी में भी प्रदेश का सिरमौर बन गया है. आबकारी विभाग की 2025 की रिपोर्ट ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है. बीते एक साल में इंदौरवासियों ने 6.17 करोड़ लीटर शराब पी डाली और इस पर 3731 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम उड़ा दी. आंकड़ों के लिहाज से यह प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी शराब खपत है, जिसने इंदौर को सीधे टॉप पर पहुंचा दिया.
रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2025 के बीच इंदौर जिले में 6 करोड़ 17 लाख 22 हजार 561 लीटर शराब बिकी. यह आंकड़ा 2024 से भी ज्यादा है. हालांकि सालभर में बढ़ोतरी सिर्फ 0.41 प्रतिशत रही, लेकिन पिछले चार सालों की तस्वीर देखें तो कहानी बिल्कुल अलग है. 2021 में जहां खपत करीब 3.55 करोड़ लीटर थी, वहीं 2025 में यह 6.17 करोड़ लीटर तक जा पहुंची.
यानी चार साल में शराबखोरी करीब 73.5 प्रतिशत बढ़ गई. सबसे दिलचस्प बदलाव देसी शराब को लेकर सामने आया है. इंदौर में देसी शराब का नशा अब उतरता दिख रहा है. 2024 में जहां 2.08 करोड़ लीटर देसी शराब बिकी थी, वहीं 2025 में यह गिरकर 1.48 करोड़ लीटर पर आ गई. यानी एक ही साल में 60 लाख लीटर की सीधी गिरावट, करीब 29 प्रतिशत कम खपत. यह बीते चार वर्षों का सबसे निचला स्तर है.
सिर चढ़कर बोल रहा विदेशी शराब और बियर का क्रेज
इसके उलट विदेशी शराब और बियर का क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में 1.39 करोड़ लीटर विदेशी शराब और रिकॉर्ड स्तर पर 3.30 करोड़ लीटर बियर की खपत दर्ज की गई. यानी विदेशी शराब की बिक्री में 8 प्रतिशत और बियर की बिक्री में 19 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई. अकेले बियर की खपत में 52.25 लाख लीटर का उछाल आया. साफ है कि इंदौर का युवा वर्ग की अब देसी छोड़ बियर और ब्रांडेड बोतल पहली पसंद बन गई है.
इंदौर में 325 जगहों से की जा रही शराब की सप्लाई
शहर में शराब आसानी से मिले, इसके लिए भी पूरा नेटवर्क खड़ा है. जिले में 173 शराब दुकानें चल रही हैं, वहीं 149 बार, होटल, रेस्टोरेंट और क्लब में खुलेआम जाम छलक रहे हैं. सेना और अर्धसैनिक बलों की कैंटीन जोड़ दें तो 325 जगहों से शराब की सप्लाई हो रही है. इन्हीं ठिकानों से करोड़ों लीटर शराब शहर की नसों में उतर रही है और इस शराबखोरी से सरकार की चांदी कट रही है.
हर जाम के साथ भर रहा सरकार का खजाना
सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी ने नव भारत को बताया कि सिर्फ अप्रैल से दिसंबर 2025 के नौ महीनों में ही 1408 करोड़ रुपए का आबकारी राजस्व सरकार को मिला. यानी हर जाम के साथ सरकारी खजाना भरता जा रहा है.
अवैध शराब के 9989 केस, 59,620 लीटर जब्त
अवैध शराब पर कार्रवाई करते हुए 9989 प्रकरण दर्ज किए गए और 59,620 लीटर अवैध शराब जब्त की गई. कुल मिलाकर तस्वीर साफ है, इंदौर अब सिर्फ साफ सुथरा शहर नहीं, बल्कि प्रदेश का सबसे बड़ा शराब बाजार भी बन चुका है. सवाल यह है कि यह रिकॉर्ड शहर की शान बनेगा या आने वाले समय में स्वास्थ्य और सामाजिक संकट की वजह? आंकड़े फिलहाल यही बता रहे हैं कि इंदौर में अभी जमकर जाम छलक रहा है
