नयी दिल्ली, 11 मार्च (वार्ता) केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के कामकाज पर राज्य सभा में मंगलवार को हुई चर्चा विचारधारा की लड़ाई बन गयी जिसमें विपक्ष ने सरकार पर नयी शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में एक विचारधारा विशेष को प्रोत्साहित किए जाने का अरोप लगाया तो सत्ता पक्ष ने कहा कि कांग्रेस जैसे दलों को पाठ्य पुस्तकों में राष्ट्रभक्ति और भारत के प्राचीन ज्ञान का समावेश ‘पाप’ लगता है।
विपक्ष ने सरकार पर शिक्षकों और कुलपतियों की नियुक्ति में खास विचारधारा वालों को वरीयता दिए जाने, हिंदी को थोपने तथा विपक्षी दल की सरकारों वाले राज्यों के साथ पैसा जारी करने में भेदभाव का आरोप लगाया। इसके जवाब में सत्ता पक्ष ने कहा कि मोदी सरकार में भारत में शिक्षा क्षेत्र पर खर्च का अनुपात सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के साढ़े चार प्रतिशत तक पहुंच गया है जो अमेरिका जैसे देश से ऊपर है। शिक्षा के क्षेत्र में एक नयी सोच के साथ एक नयी क्रांति आ रही है, कायाकल्प हो रहा है। देश की 13 भाषाओं में आज इंजीनियरिंग की पढ़ाई को हो रही है। शिक्षा के क्षेत्र में निवेश तेजी से बढ़ा है, अनुसंधान एवं कौशल विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
शिक्षा मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा शुरू करते हुए कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने देश की वर्तमान सरकार की नीतियों की तुलना पाकिस्तान की मजहबी देश की नीतियों से की और कहा कि आज भारत में भी पाकिस्तान जैसे हालात पैदा हो रहे हैं।
श्री सिंह ने अपनी बात को बल देते हुए पाकिस्तान की एक महिला शायर फहमीदा रियाज की बात कही जिसमें उन्होंने लिखा है- “तुम भी बिल्कुल हम जैसे निकले, अब तक कहाँ छुपे थे भाई। वो मूर्खता, वो घामड़पन, जिसमें हम ने सदी गँवाई। आख़िर पहुँची द्वार तुहारे, अरे बधाई बहुत बधाई ..”
श्री सिंह ने सत्ता पक्ष की सीटों की ओर संकेत करते हुए कहा कि यह कविता आज के भारत के लिए है ‘आप की नीतियों, आप की सरकार के 11 साल के कामों ने देश को ऐसी स्थिति में ला दिया है।”
उनके ठीक बाद बोलने के लिए खड़े हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ सदस्य घनश्याम तिवाड़ी ने अपने वक्तव्य की शुरूआत राष्ट्रकवि स्वर्गीय मैथिलीशरण गुप्त की विख्यात कविता भारत-भारती / अतीत खंड / की पंक्तियों-
“ ‘हाँ’ और ‘ना’ भी अन्य जन करना न जब थे जानते, थे ईश के आदेश तब हम वेदमंत्र बखानते” से करते हुए कहा कि बच्चों के पाठ्यक्रम में बंदाबैरागी की बहादुरी, चारो साहबजादों की शहादत जैसी बातों को शामिल करना “कांग्रेस को पाप (का काम) लगता है।”
श्री तिवाड़ी ने सवाल किया कि कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणाली की खोज के लिए आर्यभट्ट को पढ़ कर क्या बुरा किया जब कि अमेरिका के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन नासा ने उनको एक महान खगोल शास्त्री के रूप में अपने यहां स्थापित किया है।
श्री सिंह ने कहा कि शिक्षा की सुलभता और गुणवत्ता महत्वपूर्ण है, लेकिन सवाल है कि 2020 की नयी शिक्षा नीति का जो उद्देश्य बताया गया था क्या उसका क्रियान्वयन उसकी भावना के अनुरूप हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस नीति पर सदन में चर्चा नहीं कराई गयी और इसमें कस्तूरी रंगन समिति की सिफारिशों को शामिल नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि 18 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए शिक्षा सुलभ बनाने के लक्ष्य से मैं सहमत हूं, लेकिन इसके लिए शिक्षा एवं महिला एवं बाल विकास में समन्वय अभी तक नहीं बन पाया है। उन्होंने इस काम को मिशन मोड में लेने की अपील करते हुए कहा कि देश में 52 प्रतिशत महिलाएं रक्त की कमी तथा 39 प्रतिशत बच्चे कुपोषित है।
उन्होंने शिकायत की कि नयी नीति में शिक्षा संस्थाओं के संकुल की अवधारणा से कई स्कूल बंद हो रहे हैं और शिक्षा के अधिकार के अंतर्गत प्राथमिक स्कूलों को घर के नजदीक रखने के सिद्धांत की उपेक्षा हो रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में 30 हजार स्कूल बंद कर दिए गए है और गरीबों के बच्चे प्राइवेट स्कूल में जाने को मजबूर हो रहे है। उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्त से शिक्षा मंहगी होगी।
श्री सिंह ने नयी शिक्षा नीति में तीन-18 वर्ष के बीच के बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा सुविधा सुलभ कराने के लक्ष्य के आधार पर शिक्षा के अधिकार अधिनियम में संशोधन कर वहां भी छह से 14 वर्ष के बच्चों की जगह तीन-18 वर्ष के बच्चों के लिए प्रावधान शामिल करने का सुझाव दिया। कांग्रेस सदस्य ने प्रत्येक 15 लाख की जनसंख्या पर एक नवोदय विद्यालय स्थापित करने की मांग भी की।
उन्होंने कहा कि कौशल विकास 18 की जगह 14 वर्ष की आयु से शुरू किया जाए।
श्री सिंह ने कहा कि भारत सांप्रदायिक सद्भाव का उदाहरण रहा है पर अब इस देश में एनसीईआरटी के पाठ्यक्रमों में सांप्रदायिकता के संकेत हैं, महात्मा गांधी की हत्या का प्रसंग निकाल दिया गया। हिंदू मुस्लिम एकता के प्रसंग भी हटा दिए गए है।
श्री सिंह ने कहा कि पीएम श्री स्कूलों के अनुबंध पर हस्ताक्षर न करने वाले राज्यों पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु के सर्व शिक्षा अभियान के पैसे रोक दिए गए जो संघवाद के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि मानविकी और समाज विज्ञान के लिए विख्यात नयी दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में आईआईटी के प्रोफेस को वीसी बना दिया गया और उसने वहां पहुंच कर इंजीनियरिंग और प्रबंधन की फेकेल्टी चालू कर दी।
उन्होंने कहा कि सरकार को विश्व विद्यालय अनुदान आयोग के जरिए अनुदान की व्यवस्था जारी रखनी चाहिए क्योंकि केवल कर्ज के आधार पर काम चालने वाले विश्वविद्यालय फीस बढ़ाने को मजबूर होंगे और पढ़ाई महंगी हो जाएगी ।
उन्होंने सरकारी विश्वविद्यालयों को माल एवं सेवा कर से मुक्त रखने की की मांग की और कहा कि अनुसंधानकर्ताओं को पेटेंट से मिलने वाली रशि पर कोई कर नहीं लगना चाहिए।
श्री सिंह ने कहा कि यह विचारधारा की लड़ाई है। इसमें हम उन लोगों के साथ हैं जो सही मायने में सबका साथ सबका विकास के साथ काम करते हैं , पूरे देश को साथ लेकर चलना चाहते हैं।
दूसरे वक्ता के रूप में श्री घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि श्री मोदी के आने के बाद कुछ किताबों में परिवर्तन हुआ है। उन्होंने कहा, ‘पाठ्यक्रम में बीर बाल दिवस को शामिल किए गए, बंदा बैरागी की बहादुरी, चारों साहब जादों की शहादत को किताबों में शामिल करना कांग्रेस को पाप लगता है हमारे शिक्षा मंत्री प्रधान (धर्मेंद्र) ने ऐसा कर के राष्ट्र धर्म का पालन किया वह बधाई के पात्र किया।”
उन्होंने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान अब समग्र शिक्षा अभियान बन गया है जिसमें में शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण का भी प्रावधान है। इसके लिए इस बार बजट में 41250 करोड़ रुपये का प्रावधान। उन्होंने कहा आज तक किसी भी सरकार ने स्कूली शिक्षा के लिए उतना काम नहीं किया जितना मोदी सरकार ने किया है। स्कूलों में 11.8 करोड़ बच्चों को पुस्तक , ड्रेस, मध्याह्न भोजन और दूध आदि सबकुछ दिया जा रहा है। इसके लिए 12500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसी के तहत पीएम श्री योजना में 14500 आधुनिक स्कूलों का निर्माण किया जा रहा है। पीएम श्री को अधिकांश राज्यों ने स्वीकार किया है । पीएम श्री आज एक आदर्श योजना बन गयी है।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, नवोदय विद्यालय कुछ रिक्तियों की बात है तो नियमों के तहत उन्हें राज्य सरकारों को भरा जाना है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा पर अकेले ही सकल घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत के बराबर खर्च कर रही है। इसमें राज्यों के योगदान को भी जोड़ दिया जाए तो यह जीडीपी के 4.5 प्रतिशत तक पहुंच जाता है जो अमेरिका जैसे देश के चार प्रतिशत से अधिक है।
उन्होंने कहा मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के अंत तक यह जीडीपी के छह प्रतिशत तक चला जायेगा। श्री तिवाड़ी ने कहा कि उच्च शिक्षा के बारे में जितना दस वर्ष में उतना काम 50 साल में नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई आज 13 क्षेत्रीय भाषाओं में होने लगी है। उन्होंने दीक्षा पोर्टल, ई-पाठशाला , पीएम ई-विद्या, एक कक्षा एक चैनल तथा रोजगार एवं कौशल विकास की मोदी सरकार की पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति से एक कायाकल्प हो रहा है।
उन्होंने कहा, “जितने पारदर्शी तरीके से आज विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में कुलपति तथा एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्तियां हो रही हैं, वैसा पहले पहले कभी नहीं था। विश्वविद्यालय कांग्रेस के अड्डे बन गये थे। हम विश्वविद्यालयों के अर्बन नक्सल का मैदान नहीं बनने देंगे।”
तृणमूल कांग्रेस के रीताब्रता बनर्जी ने कहा कि नयी शिक्षा नीति को राज्यों पर थोपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को शिक्षा पर बड़ी धनराशि खर्च करनी पड रही है और केन्द्र सरकार उनके हिस्से की राशि का भुगतान नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल राज्यों में विश्वविद्यालयों के माध्यम से केन्द्र सरकार का एजेन्डा चलाने में बिलकुल नहीं हिचकिचा रहे हैं।
श्री बनर्जी ने कहा कि शिक्षा केन्द्रीय सूची का विषय नहीं होने के बावजूद इसमें केन्द्र की नीतियों को थोपा जा रहा है जो सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 -25 में अब तक केन्द्र ने पश्चिम बंगाल के लिए शिक्षा क्षेत्र में कोई राशि जारी नहीं की है जबकि पिछले वित्त वर्ष की भी करोड़ों रूपये की राशि पहले से बकाया है। उन्होंने कहा कि यह पैसा न देकर केन्द्र सरकार राज्य के लोगों को शिक्षा के अधिकार से वंचित कर रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया की रिपोर्टों से पता चला है कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत भी किसी न किसी बहाने से राज्य सरकार को पैसे का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश में 54 हजार शिक्षण संस्थान अल्पसंख्यक संस्थानों द्वारा चलाये जा रहे हैं और इनमें सभी वर्गों के बच्चे पढते हैं लेकिन इन संस्थानों के कामकाज में हस्तक्षेप किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने पाठ्यक्रम से रवीन्द्रनाथ टैगोर का अध्याय हटा दिया है इसे किस तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता ।
आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा कि शिक्षित भारत ही विकसित भारत बन सकता है। उन्होंने कहा कि लेकिन मौजूदा हालात को देखकर यह आसान नहीं लगता। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष पूरे देश में 54 लाख से अधिक बच्चों ने सरकारी स्कूल की शिक्षा छोड़ी है। इन बच्चों की संख्या भाजपा शासित राज्यों में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में 70 परीक्षाओं के पर्चे लीक हुए हैं और इससे निपटने के लिए इस संबंध में कोई राष्ट्रीय कानून बनाये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से पौने दो करोड़ बच्चे प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने आंकडे देते हुए विभिन्न शिक्षा योजनाओं में निर्धारित बजट को संशोधित कर उसमें कमी करने का आरोप लगाया। सदस्य ने मिड डे मील योजना में भी 19 प्रतिशत राशि कम करने का दावा किया। उन्होंने मुगलों की क्रूरता के साथ साथ अंग्रेजों की क्रूरता का इतिहास और अंग्रेजों का साथ देने वाले संगठनों का इतिहास भी पढाये जाने की मांग की।
वाईएसआरसीपी के गोला बाबूराव ने प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एक तरह से देश में प्राथमिक शिक्षा का निजीकरण हो गया है जिससे गरीब लोग अपने बच्चों को पढाने में असमर्थ है। उन्होंने कहा कि इस तरह से वर्ष 2047 तक भारत विकसित देश कैसे बनेगा। उन्होंने कहा कि आन्ध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बच्चों को शिक्षा के लिए काफी दूर जाना पड़ता है और वहां भी अध्यापकों का स्तर बेहतर नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के कामकाज पर भी सवाल उठाये।
राष्ट्रीय जनता दल के प्रो. मनोज झा ने कहा कि देश भाषा के विवाद में काफी कुछ गंवा रहा है। उन्होंने कहा कि भाषाएं लोक माध्यम से बढती है सरकारों से इसका प्रसार प्रचार नहीं होता। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि सदन में अब तक नयी शिक्षा नीति पर चर्चा नहीं हुई है यह बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि पांचवीं तक की शिक्षा मातृभाषा में दी जानी चाहिए लेकिन उसके बाद समाजिक आर्थिक परिवेश को ध्यान में रखकर भाषा पढाई जानी चाहिए। उन्होंने सरकारी स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाये जाने की बात कही। कोचिंग संस्थान के फलने फूलने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस पर अंकुश लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थान विचारों का रणक्षेत्र बन रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने देश में शिक्षा व्यवस्था को अधर में लटकने की बात कहते हुये कहा कि नयी शिक्षा नीति पर जितने पैमाने पर चर्चा की जानी थी नहीं की गयी और इसको अंतिम रूप दिये जाने के दौरान न:न तो राज्यों के साथ ही और न:न ही विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श किया गया। सकल घरेलू उत्पाद का छह प्रतिशत शिक्षा पर व्यय करने का पिछले बजट में कहा गया था, लेकिन अभी यह तीन प्रतिशत से भी कम है। केन्द्रीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों में 33 प्रतिशत स्थान रिक्त है और इन पर भर्तियां नहीं हो पा रही है जिससे आरक्षण पाने वालों को भी नौकरी नहीं मिल रही है। सरकारी स्कूलों में अध्यापकों को 25 ऐसे कार्य करने होते हैं जिनका शिक्षा से कोई लेना नहीं होता है। इसके कारण सरकारी स्कूलों के वजाय निजी स्कूलों की ओर लोग जा रहे हैं। स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने वालों का मानदेय दो हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया जाना चाहिए।
भाजपा की रमिलाबेन बेचारभाई बारा ने कहा कि मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद से परिवर्तन जारी है। शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक पैमाने पर सुधार किया गया है। जब श्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तभी उन्होंने कन्या शिक्षा को बढ़ावा दिया था और प्रधानमंत्री बनने के बाद बेटी पढ़ाओ को नारा दिया और पूरे देश में बालिका शिक्षा पर जोर दिया गया। नयी शिक्षा नीति में शिक्षा के लिए बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने के साथ कौशल विकास पर भी जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री ग्रामीण और शहरी शिक्षा के अंतर को पाटने का काम कर रहे हैं।
कांग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि नयी शिक्षा नीति शिक्षकों को प्रशिक्षित करने पर जोर देती है। देश में मात्र 13 प्रतिशत ही शिक्षक प्रशिक्षित हैं। जब देश के 80 करोड़ लोग पांच किलो राशन पर जीवन यापन कर रहे हैं और ऐसे लोगों के बच्चों को सरकार कैसे डिजिटल शिक्षा दे सकती है। अल्पसंख्यक संस्थानोें को किस तरह से नयी शिक्षा नीति का लाभ मिलेगा। एनसीईआरटी की किताबों में सांप्रदायिकता को जोड़ने का आरोप लगाते हुये उन्होंने कहा कि नुकता हटाया जा रहा है। पीमए श्री स्कूल योजना के तहत भी सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप लगाते हुये कहा कि यह सरकार अभी बच्चों को झूठा इतिहास पढ़ाया जा रहा है। बदलाव के नाम पर विश्वविद्यालय परिसरों में काम किया जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस की मौसम बी नूर ने कहा कि केन्द्र सरकार पश्चिम बंगाल के लिए आवंटित अधिकांश परियोजनाओं की धनराशि रोक दी है या बहुत कम मात्रा में जारी की गयी है। समग्र शिक्षा में पीएम श्री योजना के तहत काम करने का उल्लेख नहीं है। इसके लिए राज्यों को 40 प्रतिशत हिस्सेदारी देनी है। पिछले कुछ वर्षाें से उनके प्रदेश को शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए राशि नहीं दी गयी है।
जनता दल सेक्युलर के एचडी देवेगौड़ा ने शिक्षा पर हाल में हो विवाद हुये हैं उस पर शिक्षा मंत्री से पहल करने की अपील करते हुये कहा कि इस तरह की बात नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में 30 निजी शिक्षण संस्थान है और शिक्षा में उनकी महत्ती भूमिका है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कार्यरत है। कुछ को तो डिम्ड विश्वविद्यालय का भी दर्जा मिला हुआ है। ये संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में सौ साल पहले जो शिक्षण संस्थान शुरू किये गये आज राज्य सरकार के पास वेतन देने के लिए पैसे नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने एक साथ 1.56 लाख महिलाओं को शिक्षक के पद पर नियुक्त किया था और उस समय महिलाओं के लिए कोई आरक्षण भी नहीं था।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि यह सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न:न सिर्फ शिक्षा पर बल्कि कौशल विकास के लिए बेहतर काम कर रहे हैं। नयी शिक्षा नीति और अन्य नीतियों बहुत ही लाभप्रद है। महाराष्ट्र शिक्षा के मामले में अग्र सोची राज्य है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी और तमिलनाडु में तमिल में स्कूली शिक्षा चल रही है, लेकिन इससे बच्चे पढ़कर बेहतर कैरियर नहीं बना सकते हैं। इन स्कूलों से पढ़े बाहर काम नहीं कर सकते हैं। उन्होंने सुझाव देते हुये कहा कि केन्द्र को राज्यों को प्रोत्साहित करना चाहिए कि वे अपने स्कूलों को अपग्रेड करें और पूरे देश में राज्यों के सहयोग से सीबीएसई स्कूलों को अपग्रेड किया जाना चाहिए। बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए विदेशों में पढ़ने जाने वालों का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि विदेशी संस्थानों के साथ साझेदारी की जानी चाहिए या देश में वैश्विक स्तर के संस्थान बनाये जाने चाहिए।
