ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
ग्वालियर चंबल में इन दिनों प्रदेश के बड़े कांग्रेस नेताओं का आना जाना लगा है। टारगेट अगले साल होने वाले नगर निगम चुनाव हैं। जीतू पटवारी 14 को ग्वालियर और शिवपुरी के बॉर्डर पर बसे मोहना नगर में जनाक्रोष रैली करेंगे तो पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने आज से चार दिनों के लिए ग्वालियर में डेरा डाल दिया है। आज वे नेताओं के घरों पर जाकर मेल मुलाकात में व्यस्त रहे। वे भिंड मुरैना भी जाएंगे। पटवारी की रैली के दिन वे दतिया में रहेंगे। पार्टी के विभागों, प्रकोष्ठों के प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह चौहान भी ग्वालियर में ही डेरा डाले हुए हैं। यह कहने में गुरेज नहीं कि सिंधिया के अपनी टीम के साथ पार्टी छोड़ भाजपा में जाने के बाद अंचल में कांग्रेस कमजोर हुई है।
संगठनात्मक ढांचा भी कमजोर पड़ा है। यही वजह है कि प्रदेश कांग्रेस ने ग्वालियर चंबल पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। पार्टी ने जनाक्रोष रैली के लिए मोहना का चयन सुनियोजित रणनीति के तहत किया है। मोहना से बहने वाली सियासी हवा ग्वालियर जिले की भितरवार, डबरा और ग्वालियर देहात सीटों के अलावा शिवपुरी जिले को भी प्रभावित करती है। यही वजह है कि इससे पहले पार्टी ने नौ जनवरी को भी यहां पटवारी की रैली का कार्यक्रम रखा था लेकिन तब प्रशासन ने ऐन मौके पर अनुमति नहीं दी थी, इस बार अनुमति मिल गई है। रैली को कामयाब बनाने ग्रामीण कांग्रेस के सदर प्रभूदयाल जौहरे और यहां से एक बार फिर से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव अगले तीन रोज तक के लिए मोहना में ही जमे हैं।
धर्म के रास्ते नरोत्तम का डबरा रिटर्न
सूबे की काबीना में होम और हैल्थ के साथ तमाम वजनदार महकमे संभाल चुके डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने अपने गृहनगर डबरा में नवग्रह मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में बागेश्वर बाबा, पं. प्रदीप मिश्रा, दाती महाराज जैसी शीर्षस्थ अध्यात्म विभूतियों के साथ अपने विशिष्ट अंदाज में रामकथा कहने वाले कवि कुमार विश्वास को बुलाकर फिलवक्त यह साबित कर दिया है कि वे राजनीतिक क्षेत्र के साथ धार्मिक जगत में भी असर रखते हैं। नरोत्तम पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसके बाद दो बार राज्यसभा के टिकट के लिए उनका नाम चला लेकिन उम्मीद मुकम्मल नहीं हुई। भगवा दल की सूबाई सदारत भी हाथ से फिसल गई।
कुछ शुभचिंतकों ने उन्हें हाशिए पर मान लिया और इसी दरम्यान नवग्रह मंदिर की स्थापना और इसकी प्राण प्रतिष्ठा के भव्यतम आयोजन को उनके कथित राजनीतिक पुनर्जीवन के प्रयासों से जोड़कर दर्शाया जा रहा है लेकिन नरोत्तम को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वे कहते हैं कि डबरा उनकी जन्म और कर्मभूमि है और यहां की खुशहाली के लिए हो रहे आयोजन में भी कोई राजनीति तलाशे तो उनका कसूर क्या ! वैसे नरोत्तम के लिए राजनीतिक पराभव भुगतने के बाद खुद को फिर से स्थापित करना कोई नई बात नहीं है। डबरा के रिजर्व होने बाद उन्होंने दतिया को अपना निर्वाचन क्षेत्र बनाया था, इसके बाद डबरा के राजनीतिक मामलों से वे दूर ही रहते थे लेकिन बरास्ते धार्मिक आयोजन ही सही, डबरा में उनकी मौजूदा सक्रियता ने कांग्रेस के अलावा उन भाजपाई मित्रों में भी बेचैनी पैदा कर दी है जो नरोत्तम के दतिया जाने के बाद डबरा को खुला मैदान मान रहे थे। अगले परिसीमन में डबरा के सामान्य सीट घोषित होने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
अशोक सिंह का नाम नदारत, कांग्रेस आग बबूला
सरकार द्वारा बनाई ग्वालियर विकास सलाहकार समिति में सभी वरिष्ठ स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जगह दी गई लेकिन राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह को वंचित कर दिया गया। कांग्रेस इस पर आगबबूला है। पार्टी दफ्तर पर समन्वय समिति की मीटिंग में यही मुद्दा गर्म रहा। तय हुआ कि इस मसले पर प्रभारी मंत्री सिलावट से मिला जाए। कांग्रेस की इस कवायद पर भाजपा के एक नेता का कमेंट है कि यह तो साबित हुआ कि सरकार द्वारा बनाई जिला विकास सलाहकार समिति को कांग्रेसवाले गंभीरता से ले रहे हैं, वरना अभी तक तो ग्वालियर के विकास से जुड़े हर सरकारी फरमान को हवा में ही उड़ाया जा रहा था।
लंबे इंतजार के बाद भी निराशा नसीब
आखिर साल भर के लंबे इंतजार के बाद भाजपा की शहर और देहात इकाइयों की कार्यकारिणी घोषित हो गई। नरेंद्र सिंह के समर्थकों की भरमार के साथ सिंधिया कोटे से सतेंद्र शर्मा, केशव मांझी और पवैया के नजदीकी माने जाने वाले कनवर किशोर भी जगह पा गए हैं, उधर देहात की इकाई में नरोत्तम मिश्रा के भतीजे विवेक को उपाध्यक्षी मिली है, सूची में कई बार हुई काटछांट के बाद भी कई अपेक्षित नाम रह ही गए और उन्हें निराशा हाथ लगी।
