बेबुनियाद आरोप लगाना राहुल गांधी की आदत – हरदीप सिंह पुरी

नयी दिल्ली, 11 फरवरी (वार्ता) केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एपस्टीन फाइल के संदर्भ में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुये बुधवार को विस्तार से सफाई दी और कहा कि उनका नाम इस मामले में गलत तरीके से जोड़ा जा रहा है।

श्री पुरी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस मामले में अनावश्यक विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। बेबुनियाद आरोप लगाना श्री गांधी की आदत हो गयी है। उनकी राजनीतिक बयानबाजी में “मनोरंजन का तत्व” अधिक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइल से जुड़े कई दस्तावेज पहले से सार्वजनिक डोमेन में मौजूद हैं और लगभग 30 लाख ई-मेल जारी हुए हैं।

श्री पुरी ने स्पष्ट किया कि मई 2009 से लेकर आठ वर्षों तक वह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत रहे और वर्ष 2017 में मंत्री बने। इस अवधि के दौरान अंतरराष्ट्रीय बैठकों और कार्यक्रमों में कई वैश्विक व्यक्तियों से उनकी मुलाकातें हुईं, जिनमें एप्सटिन से तीन-चार मुलाकातें भी शामिल थीं।

श्री पुरी ने कहा कि विदेश सेवा से सेवानिवृत्ति के कुछ समय बाद उन्हें इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (आईपीआई) से जुड़ने का निमंत्रण मिला था, हालांकि वह संस्था का नियमित हिस्सा नहीं थे। इसके कार्यक्रमों के दौरान या प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में एपस्टीन से मुलाकात हुई और ये सब इन अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े कार्यक्रमों का हिस्सा भर था।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा उस समय उनका प्राथमिक संपर्क लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से था और उन्होंने इंटरनेट उद्यमी को भारत आने का निमंत्रण दिया था। इसके साथ ही श्री पुरी ने कहा कि एप्सटीन के आईलैंड से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने कहा कि इन मुलाकातों को संदर्भ से हटाकर पेश करना अनुचित है और इससे जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जा है। उन्होंने श्री गांधी से तथ्यों के आधार पर राजनीति करने की सलाह देते हुए कहा कि देश के सामने सही जानकारी रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि देश में दो तरह के नेता होते हैं। एक श्री गांधी जैसे और दूसरे वे जो राजनीतिक व्यवस्था में जिम्मेदारी लेते हैं और अपना जीवन समाज सेवा तथा देश को बदलने में समर्पित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नेतृत्व के कारण ही भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।

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