एक माह में नौ बाघों की मौत का दावा

जबलपुर। हाईकोर्ट में बुधवार को प्रदेश के टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के मामले में में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि बाघों की मौत का सबसे बड़ा कारण अवैध शिकार है और इसे लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि केवल जनवरी 2026 में ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 9 बाघों की मौत हुई है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने इस संबंध में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये है।

हाईकोर्ट में भोपाल के वन्य प्राणी कार्यकर्ता अजय दुबे की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई है। जिसमें दावा किया गया है कि वर्ष 2025 में प्रदेश में 54 बाघों की मौत हुई है। आवेदक की ओर से कहा गया कि पूरी दुनिया में कुल 5,421 बाघ हैं, जिनमें से 3,167 भारत में पाए जाते हैं। मध्यप्रदेश में ही 785 टाइगर मौजूद हैं। इस कारण मप्र को टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वर्ष 2025 के दौरान प्रदेश में 54 बाघों की मौत हुई है। दलील दी गई कि वर्ष 1973 में शुरू हुए प्रोजेक्ट टाइगर के बाद यह पहला मौका है जब किसी एक राज्य में एक ही वर्ष में इतने अधिक बाघों की मौतें हुई हैं। मौतों के पीछे पोचिंग, करंट, रेल हादसे और रहस्यमयी घटनाएं शामिल हैं। आवेदक का कहना है कि प्रदेश में पिछले पांच सालों में कुल 222 बाघों की मौत दर्ज की गई है। हर साल मौत का आंकड़ा बढ़ गया है। वर्ष 2021 में 34 मौतें, 2022 में 43, 2023 में 45, 2024 में 46 और 2025 में 54 मौतें हुई हैं। केवल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ही लगभग 57 प्रतिशत मौतें अप्राकृतिक बताई गई हैं। ये मौतें शिकार, करंट लगने और संदिग्ध परिस्थितियों में हुईं थीं। हाल ही में उमरिया जिले के चंदिया रेंज में बिजली लाइन के पास टाइगर का शव मिलने से इलेक्ट्रोक्यूशन की आशंका जताई गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी और अधिवक्ता अलका सिंह पैरवी कर रहीं है।

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