मुंबई, 10 फरवरी (वार्ता) उत्तरी और पूर्वी हिस्से में शीतलहर के कारण देश में बिजली की मांग जनवरी में 4.5 प्रतिशत बढ़कर करीब 143 अरब यूनिट पर पहुंच गयी जो कम से कम 2010 के बाद का रिकॉर्ड है। बाजार अध्ययन एवं साख निर्धारक एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स की मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी के पूर्वार्ध में उत्तरी और पूर्वी भारत में भयंकर शीतलहर रही जिससे घरों को गर्म रखने के लिए बिजली की मांग में वृद्धि देखी गयी। पिछले साल जनवरी में बिजली की मांग 136 अरब यूनिट रही थी। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार 08 जनवरी से 14 जनवरी के बीच पश्चिमी और पश्चिमोत्तर भारत में औसत न्यूनतम तापमान दो से चार डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। उत्तर भारत में बिजली की मांग 5.5 प्रतिशत अधिक रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें औद्योगिक मांग का भी योगदान रहा। जनवरी में देश के विनिर्माण गतिविधियों का सूचकांक दिसंबर के 55 से बढ़कर 55.4 पर पहुंच गया। कुल मांग में औद्योगिक तथा वाणिज्यिक उपभोक्ताओं का योगदान लगभग 50 प्रतिशत रहा।
चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीने में अप्रैल से जनवरी के दौरान बिजली की मांग में साल-दर-साल 0.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जनवरी में उच्चतम मांग 245 गीगावाट रही जो 09 जनवरी की सुबह 9.52 बजे दर्ज की गयी। यह पिछले साल गर्मियों के दौरान रही 243 गीगावाट की उच्चतम मांग से अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में बिजली उत्पादन सालाना आधार पर छह प्रतिशत बढ़कर 156 अरब यूनिट पर पहुंच गया। नवीकरणीय ऊर्जा में 10 प्रतिशत, कोयला आधारित बिजली उत्पादन में करीब पांच प्रतिशत, और जल तथा परमाणु ऊर्जा उत्पादन में क्रमशः 11.8 प्रतिशत और 5.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। चालू वित्त वर्ष में कुल बिजली उत्पादन में कोयला आधारित बिजली का योगदान लगभग 74 प्रतिशत रहा। इस दौरान नवीकरणीय उर्जा की स्थापित क्षमता 39.65 गीगावाट बढ़ गयी।

