नई दिल्ली। भारत के रियल एस्टेट और अवसंरचना क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (NCLAT) के उस निर्णय को बरकरार रखा है, जिसके तहत नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड को सुपरटेक लिमिटेड की 16 अटकी हुई आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सुप्रीम कोर्ट की इस पुष्टि से एनबीसीसी की परियोजना प्रबंधन सलाहकार (PMC) के रूप में भूमिका को अंतिम कानूनी मान्यता मिल गई है और परियोजनाओं के निष्पादन के लिए स्पष्टता आ गई है। यह फैसला देश के सबसे बड़े संकटग्रस्त रियल एस्टेट पोर्टफोलियो में से एक के समाधान की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।
अदालत ने 12 दिसंबर 2024 के NCLAT आदेश को सही ठहराते हुए एनबीसीसी द्वारा प्रस्तुत टर्म्स ऑफ रेफरेंस (TOR) को भी वैध माना, जिसमें निर्माण की वास्तविक लागत पर 8 प्रतिशत पीएमसी शुल्क का प्रावधान है। साथ ही यह स्पष्ट किया कि आदेश अंतिम और बाध्यकारी होगा तथा किसी भी न्यायालय या मंच द्वारा परियोजनाओं के निष्पादन में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। समाप्त हो चुके वैधानिक अनुमोदनों को तय समय सीमा में नवीनीकृत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस निर्णय से हजारों घर खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो वर्षों से अपने घरों के कब्जे की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एनबीसीसी को सौंपी गई 16 परियोजनाएँ उत्तर प्रदेश (12), उत्तराखंड (1), हरियाणा (2) और कर्नाटक (1) में स्थित हैं। इन परियोजनाओं में लगभग 50 हजार आवासीय इकाइयाँ शामिल हैं और अनुमानित निर्माण लागत 9,445 करोड़ रुपये आंकी गई है। एनबीसीसी इनका निष्पादन केवल पीएमसी के रूप में करेगा और किसी वित्तीय देयता को स्वीकार नहीं करेगा।
एनबीसीसी पहले भी आम्रपाली समूह की 30 हजार से अधिक आवासीय इकाइयों को पूरा कर अपनी परियोजना प्रबंधन क्षमता साबित कर चुका है। कंपनी ने कहा है कि विस्तृत आदेश अपलोड होने के बाद वह निष्पादन रोडमैप को अंतिम रूप देकर गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध सुपुर्दगी सुनिश्चित करेगी। यह कदम ‘सभी के लिए आवास’ और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
