
भोपाल। सृष्टि सृजनकर्ता भगवान महादेव के भव्य-दिव्य महाशिवरात्रि उत्सव के साथ विक्रमोत्सव 2026 का शुभारंभ होगा, जो वर्ष प्रतिपदा से पंचमहाभूतों में विशेष रूप से जल तत्व के संरक्षण और संवर्धन पर केंद्रित जल गंगा संवर्धन अभियान के रूप में आगे बढ़ेगा। यह 12 फरवरी से 30 जून 2026 तक कुल 139 दिवसीय आयोजन होगा, जिसमें सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का व्यापक समावेश रहेगा। यह जानकारी संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने प्रेस वार्ता में दी। इस अवसर पर संस्कृति संचालनालय के संचालक एन.पी. नामदेव, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी, म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी तथा दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा उपस्थित रहे।
अपर मुख्य सचिव शुक्ला ने बताया कि आयोजन का प्रथम चरण महाशिवरात्रि पर सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम द्वारा शिवोहम महादेव की आराधना से प्रारंभ होगा, जबकि द्वितीय चरण 19 मार्च से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान के रूप में संचालित किया जाएगा। इस दौरान 41 से अधिक बहुआयामी गतिविधियों में 4 हजार से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे।
प्रमुख गतिविधियाँ
विक्रमोत्सव के अंतर्गत शिवरात्रि मेले, महाकाल वन मेला, कृषि मेला, कलश यात्रा, विक्रम व्यापार मेला, संगीत-नृत्य-वादन कार्यक्रम, शिवपुराण व अनादि पर्व, विक्रम नाट्य समारोह, पुतुल समारोह, अनहद वैचारिक समागम, चित्र प्रदर्शनियाँ, संगोष्ठियाँ, विक्रमादित्य न्याय समागम, भारतीय इतिहास एवं राष्ट्रीय विज्ञान समागम, वेद अंताक्षरी, कोटि सूर्योपासना, शिल्प कला कार्यशाला, प्रकाशन लोकार्पण, पौराणिक फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर मातृशक्ति कवयित्री सम्मेलन, ड्रोन शो तथा ख्यात कलाकार प्रीतम व विशाल मिश्रा की प्रस्तुतियाँ शामिल रहेंगी। साथ ही भारतीय कालगणना पर आधारित विक्रम पंचांग सहित अनेक पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भी आकर्षण
समारोह में 25 से अधिक देशों की भागीदारी रहेगी तथा अंग्रेजी, फ्रेंच, हिब्रू, रूसी, स्पेनिश, आइसलैंडिक, इटैलियन, डच, मंगोलियन, फिजियन, इंडोनेशियन, अफ्रीकन, नाइजीरियन, सिंहली, ग्रीक समेत 25 से अधिक भाषाओं की फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। महाभारत पर केंद्रित विशेष फिल्मों का प्रदर्शन भी महोत्सव का हिस्सा होगा।
देश का सबसे बड़ा सम्मान सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण
मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा “सम्राट विक्रमादित्य अंतरराष्ट्रीय अलंकरण” की स्थापना की गई है, जिसकी राशि 1 करोड़ 1 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसे देश का सबसे बड़ा सम्मान बताया गया। इसके अतिरिक्त 21 लाख रुपये का एक राष्ट्रीय सम्मान तथा 5-5 लाख रुपये के तीन राज्य स्तरीय सम्मान भी प्रदान किए जाएंगे। यह अलंकरण सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य, न्यायप्रियता और प्रजावत्सलता जैसे गुणों को समाज में पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
