देश में बनेगा उभयचर विमान एल्बेट्रोस 2.0 का पिछला हिस्सा, रक्षा और सरकारी क्षेत्रों के लिए होंगे विशेष संस्करण

नयी दिल्ली, 05 फरवरी (वार्ता) पानी और जमीन दोनों पर उतरने में सक्षम उभयचर विमान बनाने में विशेषज्ञता रखने वाली ऑस्ट्रेलियाई कंपनी एंफीबियन एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (एएआई) ने भारत में अपने एल्बेट्रोस 2.0 विमानों के एक हिस्से के निर्माण के लिए भारतीय कंपनी एपोजी एयरोस्पेस के साथ करार किया है। साथ ही एएआई ने इन विमानों के रक्षा और सरकारी ग्राहकों को विमानों की बिक्री के लिए एपोजी एयरोस्पेस को भारतीय उपमहाद्वीप में अपना प्राधिकृत प्रतिनिधि सहयोगी भी घोषित किया है। इसके अलावा, एल्बेट्रोस विमानों के लिए रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉलिंग (एमआरओ) सुविधा देने के लिए भी प्राधिकृत किया गया है।

दोनों कंपनियों द्वारा गुरुवार को आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बताया कि एपोजी एयरोस्पेस एल्बेट्रोस 2.0 विमान के लिए टेल सेक्शन (पिछले हिस्से) का निर्माण करेगी। एएआई की प्रवर्तक कंपनी एंफीबियन एयरक्राफ्ट होल्डिंग्स (एएएच) के संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष ख्वा होंग ने कहा कि भविष्य में देश में असेम्बली लाइन लगाने की भी उनकी योजना है। उन्होंने कहा कि देश में उभयचर विमानों के लिए काफी बड़ा बाजार है। कंपनी ने एल्बेट्रोस 2.0 के तीन संस्करण लॉन्च किये हैं – सैन्य, सरकारी और वाणिज्यिक। एएएच के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपी रेड्डी ने बताया कि भारतीय नौ सेना ने चार उभयचर विमानों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किये हैं और कंपनी को विश्वास है कि उसे इसका ऑर्डर मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को तत्काल 25-30 उभयचर विमानों की जरूरत है।

श्री रेड्डी ने कहा कि पहले चरण में तीन साल में 25-30 विमानों के भारत में आने की उम्मीद है। भारत इन विमानों का इस्तेमाल करने वाला एशिया का पहला देश होगा। उन्होंने बताया कि एल्बेट्रोस का डेमो विमान अगले चार-छह महीने में भारत में आ जायेगा जबकि ग्राहक के इस्तेमाल के लिए पहला विमान डेढ़ से दो साल में आ सकता है। उन्होंने बताया कि शुरुआती 15 विमान की कीमत 3,500 करोड़ रुपये के आसपास हो सकती है। एपोजी एयरोस्पेस के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) एम.वी.एन. साई ने कहा कि कंपनी के पास 10-15 विमानों के लिए संभावित ऑर्डर हैं। एल्बेट्रोस 2.0 दो इंजन वाला उभयचर विमान है। यह एक बार ईंधन भरकर 18 घंटे तक उड़ान भर सकता है और 2,200 समुद्री मील की दूरी तय कर सकता है। यह 650 पाउंड का वजन लेकर जाने में सक्षम है।

इसके सैन्य संस्करण का इस्तेमाल खोज एवं बचाव, पनडुब्बी-रोधी मिशन और जासूसी के लिए किया जा सकता है। इसके वाणिज्यिक संस्करण में सीटों की संख्या 28 तक होगी। श्री रेड्डी ने बताया कि यह 19 से अधिक सीटों वाला दुनिया का पहला उभयचर विमान है जिसे अमेरिकी और यूरोपीय पंजीकृत यात्री परिवहन के लिए प्रमाणन प्राप्त है, यानी इसका इस्तेमाल शिड्यूल उड़ानों के लिए भी किया जा सकता है। एएआई के मुख्य रणनीतिक अधिकारी संजय सिंह ने बताया कि इस विमान का इस्तेमाल समुद्री लुटेरों के खिलाफ प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। आपदा के समय लोगों को बचाने के लिए और पर्यटन में अंतिम छोर तक संपर्क मुहैया कराने में यह कारगर हो सकता है। अभी अंडमान जाने वाले पर्यटकों को दूसरे द्वीपों पर जाने के लिए लंबा इंतजार करना होता है। यह विमान उसका भी समाधान है।

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