वॉशिंगटन | अमेरिका-भारत व्यापार परिषद (USIBC) के अध्यक्ष अतुल केशप ने हालिया भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को दोनों लोकतंत्रों के लिए एक युगांतकारी घटना बताया है। उनके अनुसार, यह समझौता व्यापारिक बाधाओं को न्यूनतम करने और आर्थिक साझेदारी को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से किया गया है। इस डील के तहत अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ में बड़ी कटौती करेगा, जिसके बदले में भारत ने भी अपने आयात शुल्कों को कम करने की सहमति दी है। यह कदम दोनों देशों के व्यापारियों के लिए विकास के नए द्वार खोलेगा और निवेश की गति को “स्टार्टिंग पिस्टल” की तरह तेज कर देगा।
वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 200 अरब डॉलर है, जिसे इस समझौते के माध्यम से 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई लंबी वार्ताओं के बाद यह ठोस आकार ले सका है। अमेरिकी व्यापारिक समुदाय इस समझौते को लेकर बेहद उत्साहित है, क्योंकि यह न केवल व्यापारिक बल्कि रणनीतिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी दोनों देशों को करीब लाएगा। इस डील से रक्षा उपकरण, एयरोस्पेस, पूंजीगत मशीनरी और कृषि जैसे विविध क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
यह समझौता ऐसे समय में प्रभावी हुआ है जब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठकें कर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन, उन्नत तकनीकों का विकास और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग अब दोनों देशों की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विकास भारत की विकास क्षमता और उसकी प्रतिभा पर अमेरिकी कंपनियों के बढ़ते अटूट भरोसे को दर्शाता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका और अधिक मजबूत होगी।

