नयी दिल्ली | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट में एक ऐतिहासिक भूमिका में नजर आ सकती हैं। बंगाल वोटर लिस्ट के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) विवाद पर दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी खुद अपनी दलीलें पेश कर सकती हैं। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करेगी। चूंकि मुख्यमंत्री ने कानून की पढ़ाई की है, इसलिए टीएमसी सूत्रों का दावा है कि वे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाताओं के नाम काटे जाने के मुद्दे पर सीधे अदालत से संवाद करना चाहती हैं।
इस कानूनी जंग के केंद्र में चुनाव आयोग द्वारा चिन्हित की गई ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ (तार्किक विसंगतियां) सूची है। टीएमसी का आरोप है कि 2002 की वोटर लिस्ट से मिलान के दौरान तकनीकी आधार पर करीब 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम संदिग्ध सूची में डाल दिए गए हैं। इनमें माता-पिता और बच्चे की उम्र में कम अंतर या स्पेलिंग की गलतियों जैसे आधार शामिल हैं। ममता बनर्जी का तर्क है कि इन विसंगतियों के नाम पर वास्तविक वोटर्स को मताधिकार से वंचित करना लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है। टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी इस प्रक्रिया को ‘मनमाना’ बताते हुए आयोग पर सवाल उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपनी याचिका में निर्वाचन आयोग को पक्षकार बनाते हुए मांग की है कि जब तक सभी दावों और आपत्तियों का पूरी तरह निपटारा न हो जाए, तब तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित न की जाए। इससे पहले 19 जनवरी को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता बरतने और विसंगति वाली सूचियों को सार्वजनिक कार्यालयों में प्रदर्शित करने का आदेश दिया था। आज की सुनवाई राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम है क्योंकि बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच यह मुद्दा ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

