
जबलपुर | राष्ट्रीय हरित अधिकरण, एनजीटी ने सतना जिले में एक निजी तालाब में औद्योगिक अपशिष्ट जल छोड़े जाने के आरोपों के मामले में राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। साथ ही कलेक्टर सतना व मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों की संयुक्त कमेटी को रिपोर्ट पेश करने निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।
एनजीटी के न्यायिक सदस्य एसके सिंह व विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की युगलपीठ ने ग्राम सीतपुरा जिला सतना के किसान रमेश सिंह की शिकायत पर संज्ञान आधारित सुनवाई की। शिकायतकर्ता की कृषि भूमि रिलायंस बायोफ्यूल एनर्जी प्लांट के समीप स्थित है, जहां लगभग चार एकड़ क्षेत्रफल में फैला एक निजी तालाब सिंचाई व मछली पालन के लिए उपयोग किया जाता है। उसका आरोप है कि अगस्त 2025 में औद्योगिक इकाई से निकला सीवेज व अपशिष्ट जल तालाब में प्रवेश कर गया, जिससे पानी काला हो गया और बड़ी संख्या में मछलियों की मृत्यु हो गई। इसके अलावा क्षेत्र में दुर्गंध फैलने व मानव एवं पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिला। एनजीटी ने पाया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए जल नमूनों की जांच में कोलीफार्म बैक्टीरिया की उच्च मात्रा पाई गई, जिससे गंभीर जल प्रदूषण की पुष्टि होती है। एनजीटी ने माना कि मामले में पर्यावरण से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है।
