कोलकाता | प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार सुबह पश्चिम बंगाल में अवैध कोयला खनन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। केंद्रीय एजेंसी की टीमों ने कोलकाता सहित राज्य के 12 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई उस विस्तृत जांच का हिस्सा है जिसका उद्देश्य कोयला चोरी के जरिए कमाए गए करोड़ों रुपये के काले धन के नेटवर्क को ध्वस्त करना है। अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी में उन शेल कंपनियों और बिचौलियों को निशाना बनाया गया है, जिनके माध्यम से अवैध कमाई को सफेद किया जा रहा था। इस कार्रवाई से कोयला माफियाओं और उनके रसूखदार मददगारों में हड़कंप मच गया है।
ईडी की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि कोयला तस्करी का यह जाल केवल बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार पड़ोसी राज्य झारखंड के बड़े सिंडिकेट से जुड़े हैं। हाल ही में झारखंड में हुई छापेमारी के दौरान मिले गुप्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों ने बंगाल के कई व्यापारियों और सिंडिकेट सदस्यों की संलिप्तता की ओर इशारा किया था। इसी इनपुट के आधार पर आज की कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है। जांच एजेंसी का मानना है कि अंतर-राज्यीय सीमा पर सक्रिय यह माफिया तंत्र न केवल खनन क्षेत्रों से कोयले की चोरी कर रहा था, बल्कि इसके परिवहन के लिए अवैध रास्तों का इस्तेमाल कर सरकारी राजस्व को भारी चूना लगा रहा था।
एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह छापेमारी उस मामले से पूरी तरह अलग है, जिसमें हाल ही में राजनीतिक सलाहकार फर्म आई-पैक (I-PAC) के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के ठिकानों पर तलाशी ली गई थी। यह नई जांच पूरी तरह से कोयले के अवैध परिवहन और उससे जुड़े वित्तीय अपराधों पर केंद्रित है। फिलहाल, ईडी की टीमें बरामद किए गए दस्तावेजों की स्क्रूटनी कर रही हैं और झारखंड से मिले सबूतों के साथ इनका मिलान किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो आज की छापेमारी में मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ रसूखदार लोगों की गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

