ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सुरक्षा बलों पर महिलाओं के साथ बलात्कार, अंग-भंग और बर्बर हिंसा के आरोप लगे हैं। इसमें अब तक 5000 से अधिक मौतें हुई हैं।
ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ चल रहे जन आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों ने अत्यंत क्रूर तरीके अपनाए हैं। तेहरान में जन्मे पत्रकार माइकल अब्दुल्लाही ने दावा किया है कि शासन ने महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। इस दमनकारी नीति के तहत व्यवस्थित मानवाधिकार उल्लंघन को अंजाम दिया जा रहा है जिससे पूरी दुनिया में भारी आक्रोश व्याप्त है। प्रदर्शनकारियों को डराने और आंदोलन को पूरी तरह खत्म करने के लिए बच्चों तक को निशाना बनाया गया है।
बर्बरता की डरावनी दास्तां
ईरानी-जर्मन पत्रकार माइकल अब्दुल्लाही ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ बलात्कार किया और उनके गर्भाशय तक निकाल दिए। कई मामलों में महिलाओं के सिर की खाल उधेड़ दी गई और उनके शरीर पर सिगरेट से जलने के कई गहरे निशान बनाए गए ताकि वे डर कर पीछे हट जाएं। ये अत्याचार विशेष रूप से उन महिलाओं पर किए गए जिन्होंने हिजाब पहनने से इनकार किया या सर्वोच्च नेता खामेनेई की तस्वीरें जलाकर अपना विरोध दर्ज किया।
सुरक्षा बलों की खुली धमकी
जर्मन अखबार ‘डाइ वेल्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार गिरफ्तार महिलाओं को सुरक्षा बलों द्वारा बार-बार बलात्कार करने और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने सुरक्षा अधिकारियों को यह कहते सुना कि वे महिलाओं को तुरंत नहीं मारेंगे बल्कि पहले उनके साथ बलात्कार करेंगे और फिर जान लेंगे। हिरासत में ली गई महिलाओं को जबरन निर्वस्त्र करना और अज्ञात इंजेक्शन देना अब वहां विरोध को कुचलने की एक सामान्य दमनकारी प्रक्रिया बन चुकी है।
साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश
माइकल अब्दुल्लाही ने आरोप लगाया कि ईरानी शासन अपनी बर्बरता के सबूत मिटाने के लिए मृतकों के शवों को उनके परिजनों को सौंपने के बजाय सीधे जला रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि यातनाओं और बलात्कार के निशानों को बाहरी दुनिया और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नजरों से पूरी तरह छुपाया जा सके। इसके बावजूद लोग सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से इन भयानक अत्याचारों की जानकारी दुनिया तक पहुंचाने का लगातार साहसी प्रयास कर रहे हैं।
