सीहोर। नपा के समीपस्थ चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर के तत्वाधान में जारी सात दिवसीय भागवत कथा के छठवें दिवस गोवर्धन महोत्सव एवं 56 प्रकार के भोग लगाए गए. मंगलवार को कथा के पहले चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर समिति के तत्वाधान में पांच कन्याओं का सर्व जातीय निशुल्क विवाह उत्सव सुबह दस बजे से बारह बजे तक किया जाएगा. कथा दोपहर बारह बजे से डेढ़ बजे होगी. फिर भोजन प्रसादी का आयोजन किया जाएगा.
सोमवार को जगद्गुरु पं. अजय पुरोहित ने कहा कि हमें अपने जीवन में कभी भी अभिमान नहीं करना चाहिए. माखन चोरी हो या गोपिकाओं के चीर हरण की लीला, प्रभु की हर लीला में एक संदेश छिपा है. जो कलियुगी मनुष्य की समझ से परे है. मनुष्य को भी अपने अभिमान से बचना चाहिए. भगवान ने हमेशा यही संदेश दिया कि वह सिर्फ प्रेम के अधीन है. जिस मनुष्य ने प्रेम से उसको पाने की कोशिश की वह हर तरह, हर रूप में उसको पा सकता है. भगवान को रिझाने के लिए बालक की तरह छल कपट रहित बन जाओ और रिझाओ फिर भगवान को पाना बहुत आसान हो जाता है.
पुरोहित ने कहा कि परमात्मा एवं परमात्मा की कथाओं पर कभी संशय नहीं करना चाहिए. वृंदावन वासी प्रत्येक वर्ष इंद्र की पूजा करते हैं परमात्मा श्रीकृष्ण के कहने पर वृंदावन वासियों ने इंद्र की पूजा बंद करके गोवर्धन पहाड़ की पूजा की. यह बात जब इंद्र को पता चली तो इंद्र ने कोप करके प्रलयकारी मेघों को आदेश दिया कि जाकर के ब्रज चौरासी वृंदावन में प्रलयकारी बारिश करो. जिससे सारा वृंदावन बह जाए. वृंदावन वासी परमात्मा श्रीकृष्ण की शरणागति में आए और परमात्मा से प्रार्थना करी कि आपके कहने पर हमने इंद्र का पूजन ना करके गोवर्धन का पूजन किया. जिससे इंद्र कोप करके हमें मार देना चाहता है. इसलिए अब आप ही हमारे प्राणों के रक्षक हैं. जब यह परमात्मा श्रीकृष्ण ने सुना तो परमात्मा ने वृंदावन वासियों से कहा कि आप सब अपने घर की सामग्रियों को ले करके मेरे साथ चलें. वृंदावन वासी परमात्मा के आदेश का पालन करते हुए परमात्मा के साथ चलें और गोवर्धन के पास पहुंच गए.
यहां पर परमात्मा श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठाका अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और वृंदावन वासियों को प्रलयकारी बारिश से बचाने के लिए पूरे 7 दिनों तक गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा. अंत में इंद्र को अपने अपराध का एहसास हुआ और वह श्रीकृष्ण की शरणागति में आया उसने परमात्मा से क्षमा प्रार्थना की भगवान ने उसको अभयदान दिया.
