“यह बजट भारत के डिजिटल भविष्य के लिए एक बेहद अहम कदम है। डेटा सेंटर्स को 2047 तक 100% टैक्स छूट देना एक बहुत बड़ा और गेम-चेंजर फैसला है। यह कुछ वैसा ही है जैसा 90 के दशक में सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री का बूम था। हम पहले से ही AI को अपना रहे हैं, और अब भारत ‘दुनिया की AI फैक्ट्री’ बनने की दिशा में बढ़ रहा है। इसके साथ बिजली, केबल और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े स्तर पर निवेश (कैपेक्स) देखने को मिलेगा।
बजट की बारीकियां भी उतनी ही अहम हैं। IT सर्विसेज की परिभाषा को व्यापक करने से अब GCCs (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स) को ट्रांसफर प्राइसिंग को लेकर स्पष्टता मिलेगी। यह साफ संकेत है कि भारत हाई-एंड टेक बिज़नेस के लिए पूरी तरह तैयार और खुला है।
हालांकि, कैपिटल मार्केट्स पर STT के असर को लेकर हमें व्यावहारिक रहना होगा। STT में बढ़ोतरी और डिविडेंड सेट-ऑफ हटने से बाजारों पर थोड़ी दबाव की स्थिति बन सकती है। इससे हाई-फ्रीक्वेंसी और आर्बिट्राज ट्रेड्स कम आकर्षक हो जाएंगे, जिसका असर कम समय में मार्केट लिक्विडिटी और लीवरेज पर पड़ सकता है। लेकिन 4.3% का संतुलित फिस्कल डेफिसिट और 12.2 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स निवेश यह दिखाता है कि लंबे समय में भारत की कमाई और ग्रोथ की कहानी अब भी मजबूत बनी हुई है।
आगे आने वाली मौद्रिक नीति पर नजर रखें, क्योंकि 13–15% की क्रेडिट ग्रोथ से 10% से ज्यादा की नॉमिनल GDP ग्रोथ हासिल करने में मदद मिल सकती है।”
