नयी दिल्ली, 21 जुलाई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने कथित तौर पर फर्जी खबरें फैलाने के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद तेजस्वी सूर्या को राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा रद्द करने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली कर्नाटक सरकार की याचिका पर विचार करने से सोमवार को इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने सख्त टिप्पणियों के साथ राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी।
पीठ ने राज्य के वकील से कहा,“इस मामले का राजनीतिकरण न करें। अपनी लड़ाई जनता के सामने लड़ें।”
बेंगलुरु दक्षिण से सांसद सूर्या ने सात नवंबर, 2024 को सोशल मीडिया पर को एक लेख साझा किया था जिसमें दावा किया गया था कि एक राज्य के किसान ने यह पता चलने के बाद आत्महत्या कर ली कि उसकी जमीन वक्फ बोर्ड ने ले ली है।
हालांकि, पुलिस की ओर से उनके इस दावे को निराधार बताने के बाद सोशल मीडिया एक्स से उस पोस्ट को हटा दिया गया था।
पुलिस ने फर्जी खबरें फैलाने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) की धारा 353(2) के तहत स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था।
आरोपी की याचिका पर न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने मुकदमा को रद्द कर दिया और कहा कि जब जांच के लिए कुछ भी नहीं है, तो आपराधिक कार्यवाही कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगी।
उच्च न्यायालय ने कहा था,“ट्वीट पोस्ट किया गया है। ट्वीट पर स्पष्टीकरण दिया गया है और ट्वीट हटा दिया गया है। इसलिए, यह समझ से परे है कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(2) के प्रावधानों का पालन कैसे किया गया।”
कर्नाटक के हावेरी के पुलिस अधीक्षक द्वारा यह स्पष्ट किए जाने के बाद कि मृतक के पिता के अनुसार आत्महत्या फसल के नुकसान और उसके द्वारा लिए गए सात लाख रुपये के कर्ज के कारण हुई थी, युवा सांसद सूर्या ने अपना सोशल मीडिया से बयान हटा दिया था।
