बलूचिस्तान में छिड़ा भीषण गृहयुद्ध, 40 घंटे की खूनी जंग में 200 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा, महिला फिदायिनों के हमलों से दहला इस्लामाबाद

क्वेटा | पाकिस्तान के संसाधन संपन्न प्रांत बलूचिस्तान में विद्रोहियों और पाक सेना के बीच जारी खूनी संघर्ष ने भयावह रूप ले लिया है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने अपने ‘ऑपरेशन हेरोफ फेज-2’ के तहत पिछले 40 घंटों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुँचाने का दावा किया है। बीएलए के प्रवक्ता जीयांद बलूच के अनुसार, इस भीषण लड़ाई में अब तक पाक सेना, पुलिस और फ्रंटियर कोर के 200 से अधिक जवान मारे जा चुके हैं। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने स्वीकार किया है कि यह दशकों की सबसे बड़ी हिंसा है, जिसमें सेना ने भी 145 विद्रोहियों को ढेर किया है।

इस विद्रोह में सबसे चौंकाने वाला पहलू ‘मजीद ब्रिगेड’ की महिला फिदायिनों की सक्रियता है। बीएलए ने जानकारी दी है कि 24 वर्षीय महिला फिदायीन आसिफा मेंगल ने 31 जनवरी को नोशकी में आईएसआई (ISI) मुख्यालय पर विस्फोटक से लदे वाहन के जरिए आत्मघाती हमला किया। वहीं, एक अन्य महिला लड़ाकू हवा बलूच ने ग्वादर में पाक सेना के साथ सीधी मुठभेड़ में अपनी जान गंवाई। इन हमलों ने पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। जूनियर आंतरिक मंत्री तलाल चौधरी ने आरोप लगाया है कि विद्रोही नागरिकों, स्कूलों और अस्पतालों को ढाल बनाकर अंधाधुंध गोलीबारी कर रहे हैं।

बलूचिस्तान में जारी यह विद्रोह अब पाकिस्तान के लिए एक ऐसा नासूर बन चुका है जिसका समाधान नजर नहीं आ रहा। दशकों से राजनीतिक रूप से हाशिए पर रहे इस प्रांत के लोगों का आरोप है कि इस्लामाबाद की सरकार और सेना उनके प्राकृतिक संसाधनों की लूट कर रही है। बीएलए जैसे अलगाववादी समूह अब पूर्ण स्वायत्तता और स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं। ग्वादर से लेकर क्वेटा तक फैली इस आग ने न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि वहां चल रहे अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स पर भी संकट खड़ा कर दिया है।

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