इंदौर:संपत्ति के फर्जी और कूट-रचित दस्तावेजों के आधार पर केनरा बैंक से 40 लाख रुपए का ऋण लेने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने बड़ी कार्रवाई की है. ईओडब्ल्यू ने बैंक अधिकारियों सहित कुल पांच आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है.ईओडब्ल्यू के अनुसार फरियादी केनरा बैंक क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर के उप महाप्रबंधक आनंद शिवानंद तोतड़ ने शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत की जांच डीएसपी नंदिनी शर्मा द्वारा की गई, जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आईं.
जांच में पाया गया कि चंद्रशेखर पचोरी ने 12 अप्रैल 2018 को मेसर्स आर. शिवम एंड कंपनी के नाम से केनरा बैंक की नंदा नगर शाखा में खाता खुलवाया. इसके बाद मशीनरी क्रय के नाम पर 40 लाख रुपए के टर्म लोन के लिए आवेदन किया था. ऋण प्रक्रिया के दौरान राममोहन अग्रवाल को को-ऑब्लिगेंट बनाया और उनकी संपत्ति को गिरवी बताया था. बैंक को प्रस्तुत मूल्यांकन और कानूनी रिपोर्ट में उषा नगर एक्सटेंशन स्थित प्लॉट नम्बर 277 को निर्विवाद, खाली और ऋण के लिए उपयुक्त दर्शाया गया. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 8 मई 2018 को बैंक ने ऋण स्वीकृत कर दिया.
पहले ही बिक चुकी संपत्ति को रखा था गिरबी
ईओडब्ल्यू की जांच में यह खुलासा हुआ कि जिस संपत्ति को गिरवी दर्शाया था, उस पर पहले से ही बहुमंजिला इमारत, फ्लैट और दुकानें बनी हुई थीं. संबंधित फ्लैट वर्ष 2009-10 में ही विक्रय हो चुके थे. ऋण स्वीकृति के समय को-ऑब्लिगेंट उस संपत्ति का वास्तविक स्वामी नहीं था. इसके बावजूद बैंक स्तर पर भौतिक सत्यापन, ड्यू-डिलिजेंस और दस्तावेजों की जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई. लोन की किस्तें जमा नहीं होने पर 1 मई 2023 को खाता एनपीए घोषित कर दिया था. इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई, जिसमें पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं. ईओडब्ल्यू ने चंद्रशेखर पचोरी, राममोहन अग्रवाल, तत्कालीन शाखा प्रबंधक रजतिन गुप्ता, तत्कालीन क्रेडिट मैनेजर कमलेश दिवानी और एक निजी मार्केटिंग फर्म के प्रोपराइटर के खिलाफ आईपीसी की धारा के साथ ही भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम की धारा के तहत एफआईआर दर्ज कर मामले में जांच की जा रही है
