नयी दिल्ली, 29 जनवरी (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें पंजाब केसरी प्रबंधन को पर्यावरणीय उल्लंघनों के संबंध में वैकल्पिक कानूनी उपायों का सहारा लेने के लिए कहा गया था। लेकिन अदालत ने मामले के खास तथ्यों को देखते हुए कुछ निर्देश जारी किए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ 23 जनवरी, 2026 के उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली दो विशेष अनुमति याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ताओं को लागू कानूनी ढांचे के तहत राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) से संपर्क करने का निर्देश दिया गया था।
यह मामला पंजाब केसरी प्रबंधन के खिलाफ शुरू की गई कई दंडात्मक कार्रवाइयों से जुड़ा है, जिसमें बिजली की आपूर्ति काटना, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी नोटिस जारी करना, प्राथमिकी दर्ज करना और अखबार के मालिकों द्वारा चलाए जा रहे होटलों को सील करना या बंद करना शामिल है। इसके अलावा प्रिंटिंग प्रेस के कामकाज को प्रभावित करने वाले कदम भी उठाए गए थे।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को वैकल्पिक उपायों का पालन करने का निर्देश देने वाले उच्च न्यायालय के आदेश में दखल देने का कोई कारण नहीं है। उसने हालांकि कहा कि कुछ स्पष्टीकरण जरूरी हैं।
अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता जल्द से जल्द अंतरिम राहत के लिए आवेदन के साथ राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण से संपर्क कर सकते हैं।
पीठ ने 20 जनवरी, 2026 के अपने पहले के निर्देशों को दोहराया जिसमें पंजाब केसरी प्रिंटिंग प्रेस को बिना किसी रुकावट के काम करने की इजाजत दी गई थी। अदालत ने साफ किया कि जब तक एनजीटी इस मामले पर फैसला नहीं कर लेता, तब तक पंजाब केसरी अखबार का प्रकाशन बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा, जो प्राधिकरण द्वारा दिए गए अंतिम आदेशों पर निर्भर करेगा।
