जबलपुर: खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के दौरान सामने आई भारी अनियमितताओं के बाद भी जबलपुर जिले में सिर्फ 13 राइस मिलर्स को दोबारा धान मिलिंग की अनुमति देने की अनुशंसा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विदित है कि कलेक्टर जबलपुर द्वारा जिले के 46 राइस मिलर्स की जांच हुई, जिनमें से 43 मिलर्स द्वारा धान परिवहन में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं। इनमें 16 मिलर्स पर एफआईआर दर्ज हुई, जबकि 27 के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए। धान उपार्जन में गड़बड़ी के बावजूद दोषी मिलर्स को दोबारा मौका देना शासन- प्रशासन पर सवाल खड़े कर रहा है।
जिसने उठाए ज्यादा लॉट, जांच में कर दिए कम
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस मिलर ने 70 लॉट उठाए थे, अधिकारियों द्वारा की गई जांच में उसी मिलर के सबसे कम लॉट कर दिए गए। इसके अलावा जिस पर लगभग लाखों रुपए की पेनाल्टी होनी थी, उन्हें हजारों रुपए में निपटा दिया है। जिसको लेकर अधिकारियों द्वारा की गई जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कार्रवाई 27 पर, राहत सिर्फ 13 को
एमपी स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन के आदेश के अनुसार 27 मिलर्स में से सिर्फ 13 मिलर्स पर परिवहन राशि, अलदान शुल्क और 5 प्रतिशत शास्ति वसूल कर मामला निपटा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इन्हीं 13 मिलर्स को वर्ष 2024-25 के लिए दोबारा धान मिलिंग की अनुमति देने की अनुशंसा भी कर दी गई।
बाकी मिलर्स का क्या.?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 27 मिलर्स दोषी पाए गए थे, तो फिर सिर्फ 13 को ही मिलिंग की अनुमति क्यों? बाकी बचे हुए 16 एफआईआर वाले और विभागीय जांच के दायरे वाले 14 मिलर्स को अनुमति से बाहर रखने का कोई स्पष्ट कारण न तो आदेश में बताया गया है और न ही सार्वजनिक किया गया है।
