नयी दिल्ली, 27 जनवरी (वार्ता) कांग्रेस ने कहा है कि सरकार आर्थिक विकास को लेकर जो आंकड़े पेश करती रही है वह जमीनी हकीकत के विपरीत है और खुद उसके आर्थिक सलाहकार का कहना है कि सकल घरेलू उत्पाद-जीडीपी का आंकड़ा ढाई प्रतिशत ज्यादा बताया गया है। पार्टी ने कहा है कि देश में बेरोजगारी का आंकड़ा बढ रहा है, जिन गरीब, युवा, महिलाओं और किसानों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे बड़ी जातियां बताया था और विकास प्रक्रिया में उन्हें प्राथमिकताएं देने का दावा किया था लेकिन उनकी बेहतरी की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है। कांग्रेस रिसर्च विभाग के चेयरमैन राजीव गौड़ा तथा रिसर्च और मॉनिटरिंग विभाग के प्रमुख अमिताभ दुबे ने मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मोदी सरकार जीडीपी के जो आंकड़े देश के सामने पेश कर रही है, वह जमीनी सच्चाई से बहुत दूर है। सरकार की गत जुलाई से सितंबर में जीडीपी की विकास दर 8.3 प्रतितश थी और महंगाई दर 0.5 प्रतिशत बताई लेकिन सवाल है कि देश में ऐसा कौन सा परिवार होगा, जिसका बजट सालाना 0.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। अगर ये आंकड़े सही हैं तो इसका मतलब है कि सरकार ने मंहगाई को खत्म कर दिया है। वास्तविक स्थिति बताती है कि आंकड़ों के हिसाब से जमीनी हकीकत एकदम भिन्न है।
उन्होंने कहा कि विकास दर बढ़ने की बात हो रही है लेकिन रूपया एशिया की सबसे ख़राब करेंसी बन चुका है। इसका कारण ये है कि एफडीआई और पोर्टफोलियो फ्लो दोनों बाहर जा रहे हैं। नेट फ्लो नेगेटिव हो गया है। हर साल करीब पांच हजार करोड़पति देश छोड़ रहे हैं और वो अपना पैसा भी लगातार बाहर खींच रहे है। सवाल है- अगर हमारी अर्थव्यवस्था इतनी अच्छी है, तो ऐसा क्यों हो रहा है, मगर आजतक इन सवालों का जवाब नहीं मिला है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा योजना गरीबों का सबसे बड़ा सहारा थी लेकिन इसके नियमों में जो बदलाव किए गए हैं और अब लोगों को पहले की तरह इसका लाभ नहीं मिलेगा। मनरेगा में पहले केंद्र 90 प्रतिशत पैसा देता था लेकिन अब 60 प्रतिशत देगा। इसी तरह पहले मनरेगा हर ग्रामीण इलाके में उपलब्ध था, वो अब नहीं होगा और मनरेगा पहले डिमांड के हिसाब से चलता था, अब बजट के हिसाब से चलेगा। बड़ा बदलाव यह है कि पहले इसकी प्लानिंग ग्राम सभा करती थी लेकि अब अफसरशाही के मुताबिक इसकी योजना बनाई जाएगी। एक तरफ देश में असमानता बढ़ रही है, पूंजीपतियों का धन बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ गरीबों को राहत देने के लिए जो कुछ योजनाएं चल रही थीं, उन्हें भी सरकार खत्म करने पर तुली है।
युवाओं की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इनके लिए नौकरियां कहां हैं। अप्रैल-सितंबर 2025 में युवा श्रम बल की भागीदारी 42.0 प्रतिशत से गिरकर 41.3 प्रतिशत रह गई और युवा रोजगार 35.8 प्रतिशत से घटकर 35.2 प्रतिशत हो गई है। उक्त अवधि तक युवा बेरोजगारी 15 प्रतिशत तक बढ़ गई थी और शहरी इलाकों में यह 18.4 फीसदी हो गई थी। इंटर्नशिप को उन्होंने कांग्रेस से मिला आईडिया बताया लेकिन कहा कि गत नवंबर के अंत तक पीएम इंटर्नशिप योजना के तहत केवल 2,066 इंटर्नशिप पूरी हुईं, जिनमें से केवल 95 को नौकरी के प्रस्ताव मिले। इसी तरह से भारत कौशल रिपोर्ट में केवल 54.81 प्रतिशत स्नातक रोजगार योग्य हैं। कौशल विकास के लिए कैग की रिपोर्ट पीएमकेवीवाई की कार्यप्रणाली को एक शानदार विफलता के रूप में उजागर करती है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 में कॉर्पोरेट मुनाफा 22.3 प्रतिशत बढ़ा लेकिन नौकरियां केवल 1.5 प्रतिशत रही जबकि जून 2024 में वेतनभोगी श्रमिकों का वास्तविक वेतन जून 2019 की तुलना में 1.7 फीसदी कम था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार गरीबों, किसानों की बात करती है लेकिन हालात यह हैं कि ग्रामीण गरीबों के सामाजिक सुरक्षा की गारंटी वाले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम-मनरेगा को संसद के शीतकालीन सत्र में खत्म कर दिया गया। इस योजना में धन की कमी है और लाभार्थियों को बाहर करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया गया है। खाद्य सब्सिडी कम हो रही है और देश की 12 प्रतिशत आबादी अल्पपोषित बनी हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (2015-16) और एनएफएचएस-5 (2019-21) के बीच, किशोरियों में एनीमिया 54.1 प्रतिशत से बढ़कर 59.1 प्रतिशत हो गया।

