नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष नेताओं के बीच मंगलवार को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है। दोपहर में होने वाले इस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को पीएम मोदी ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया है। इस समझौते के दायरे में व्यापार के 97 से 99 प्रतिशत क्षेत्र शामिल हैं। आधिकारिक वार्ता पूरी होने के बाद अब केवल औपचारिक प्रक्रियाओं का इंतज़ार है, जिसके बाद यह ऐतिहासिक समझौता अगले साल की शुरुआत से प्रभावी हो जाएगा। माना जा रहा है कि यह डील व्यापार के क्षेत्र में मोदी सरकार की अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि साबित होगी।
पीएम मोदी ने इस समझौते की खासियत बताते हुए कहा कि यह भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते का पूरक बनेगा, जिससे विनिर्माण (Manufacturing) और सहायक सेवाओं को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने भारत को ऊर्जा क्षेत्र में ‘अवसरों की भूमि’ बताते हुए घोषणा की कि देश जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा तेल शोधन केंद्र बनेगा, जिसकी क्षमता 260 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 300 मीट्रिक टन की जाएगी। यह समझौता वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक आदर्श और भविष्योन्मुखी साझेदारी का प्रतीक है। इससे भारतीय उत्पादों को यूरोप के बड़े बाजारों तक आसान पहुंच मिलेगी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, इस समझौते के तहत दोनों पक्ष 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाने या पूरी तरह समाप्त करने पर सहमत हुए हैं। सेवा क्षेत्र, विशेषकर दूरसंचार और परिवहन में भी उदारीकरण होगा। श्रम-गहन क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी और लेदर उद्योग को ड्यूटी-फ्री पहुंच दी जाएगी, जिससे देश में लाखों नए रोजगार पैदा होंगे। हालांकि, सरकार ने भारतीय किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है, ताकि ग्रामीण आजीविका पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

