
भोपाल। मध्यप्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति को लेकर विरोध तेज हो गया है. सेमी गवर्नमेंट एम्प्लाइज फेडरेशन और उपक्रम संघ ने इसे बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए कड़ा एतराज जताया है. फेडरेशन के संयोजक और पदाधिकारियों का कहना है कि निगम-मंडलों, सहकारी संस्थाओं और विभिन्न शासकीय विभागों में 65 वर्ष से लेकर 74 वर्ष से अधिक आयु के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है.
संगठन का आरोप है कि आपूर्ति निगम में 32 से अधिक तथा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन सहित अन्य संस्थानों में सैकड़ों कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति के मामले सामने आए हैं। अनिल बाजपेई और अरुण वर्मा ने कहा कि जब प्रदेश में हजारों योग्य युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, ऐसे समय में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुनः सेवा में लेना सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से गलत है. इससे न केवल युवाओं के रोजगार के अवसर छीने जा रहे हैं, बल्कि संस्थानों में मनमानी और असंतोष भी बढ़ रहा है.
फेडरेशन और उपक्रम संघ ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मांग की है कि निगम-मंडलों, सहकारी संस्थाओं और शासकीय उपक्रमों में 65 वर्ष से अधिक आयु में सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्त सभी कर्मचारियों को तत्काल सेवामुक्त किया जाए और इस प्रथा पर पूर्णतः रोक लगाई जाए. साथ ही खाली पदों पर योग्य बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग भी की गई है.
संघ ने विशेष रूप से वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इसकी विभिन्न शाखाओं में लगभग 50 से अधिक सेवानिवृत्त कर्मचारी पुनर्नियुक्ति के आधार पर कार्यरत हैं. इनमें इंदौर, रीवा और भोपाल सहित अन्य स्थानों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल बताए गए हैं. संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि पुनर्नियुक्ति की यह नीति जारी रही तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे.
