
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. मुकेश नायक ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार अब केवल आरोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर एक तरह की “खुली स्वीकारोक्ति” बन चुका है।
डॉ. नायक ने जिला कलेक्टरों के साथ हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव के कथित बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यह कहा गया है कि प्रशासनिक कार्य बिना पैसे के नहीं होते, तो यह विपक्ष का आरोप नहीं बल्कि राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी से जुड़ा वक्तव्य है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह बयान प्रशासन में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार को उजागर करता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कलेक्टर स्तर पर काम के लिए रिश्वत देनी पड़ती है, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद कैसे कर सकता है और राज्य सरकार अब तक क्या कर रही थी। डॉ. नायक ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में कई जिलों में कलेक्टरों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने अशोकनगर में कलेक्टर के तबादले से जुड़े तीन करोड़ रुपये की कथित रिश्वत का हवाला दिया और भिंड में कलेक्टर व भाजपा विधायक के बीच अवैध वसूली को लेकर सार्वजनिक विवाद का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने भूमि, रेत, शराब, खनन और तबादला-पोस्टिंग से जुड़े मामलों में व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
भाजपा शासन को “कर्ज, अपराध और भ्रष्टाचार का मॉडल” बताते हुए डॉ. नायक ने पूरे राज्य में प्रशासनिक कार्यप्रणाली की जांच, कलेक्टरों के खिलाफ आरोपों की स्वतंत्र जांच, मुख्य सचिव के बयान पर मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और प्रशासन को अधिक जन-केन्द्रित बनाने के लिए व्यापक सुधारों की मांग की।
