कराची, 22 जनवरी (वार्ता) पाकिस्तान के प्रमुख कारोबारी शहर कराची के प्रसिद्ध ‘गुल प्लाजा’ शॉपिंग सेंटर में शनिवार को हुए भयावह अग्निकांड में बचाव कार्यों के पांचवें दिन, गुरुवार को एक ही दुकान से 30 और शव बरामद होने के बाद इस हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 60 हो गयी है। इस भीड़भाड़ वाले व्यापारिक परिसर में अब भी 80 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिससे मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की गंभीर आशंका जताई जा रही है।
कराची के पुलिस उप महानिरीक्षक सैयद असद रज़ा और उपायुक्त जावेद नबी खोसो के अनुसार, ‘दुबई क्रॉकरी’ नामक दुकान से ये 30 शव मिले हैं। बताया जा रहा है कि आग लगने के बाद मची भगदड़ और धुएं से बचने के लिए इन लोगों ने खुद को दुकान के अंदर लॉक कर लिया था, लेकिन दम घुटने और आग की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। शादी के सीजन के कारण दुकान में भारी सेल चल रही थी, जिसके चलते वहां क्षमता से अधिक लोग मौजूद थे और दुकानें भी देर रात तक खुली थी।
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बरामद किए गए अधिकांश शव इतनी बुरी तरह झुलस चुके हैं कि उनकी सामान्य शिनाख्त संभव नहीं है। पुलिस के अनुसार अब तक केवल 10 से 13 शवों की पहचान हो पाई है। अन्य मृतकों की शिनाख्त के लिए 50 से अधिक परिवारों के डीएनए नमूने लिए गए हैं, जिन्हें मिलान के लिए कराची विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में भेजा गया है। इस बीच, लापता लोगों के परिजनों ने राहत और बचाव कार्य की धीमी गति को लेकर प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया है।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, एक हजार से अधिक दुकानों वाले इस तीन मंजिला मॉल में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था। इमारत में न तो स्मोक अलार्म थे, न ही फायर स्प्रिंकलर सिस्टम। इसके अलावा, रात के समय मॉल के 16 में से 13 निकास द्वार बंद थे, जिससे लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और निर्देश दिया है कि जब तक आखिरी शव नहीं मिल जाता, तब तक मलबा हटाने का काम पूरी सावधानी से जारी रखा जाए। इस अग्निकांड को कराची के इतिहास की सबसे दर्दनाक औद्योगिक त्रासदियों में से एक माना जा रहा है।

