
दावोस। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रथम उप प्रबंध निदेशक रही गीता गोपीनाथ ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत के लिए सबसे बड़ा आर्थिक जोखिम वैश्विक टैरिफ या व्यापार बाधाएं नहीं, बल्कि बढ़ता प्रदूषण है।
गीता गोपीनाथ के मुताबिक, प्रदूषण का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर स्वास्थ्य, श्रम उत्पादकता और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को प्रभावित करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका आर्थिक नुकसान वर्षों तक महसूस किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि टैरिफ और व्यापार नीतियां समय के साथ बदलती रहती हैं, लेकिन प्रदूषण एक संरचनात्मक समस्या है, जिसका असर लंबे समय तक बना रहता है। इसलिए भारत के लिए यह एक शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए।
दावोस में बातचीत के दौरान गीता गोपीनाथ ने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और वैश्विक स्तर पर उसका कद मजबूत हो रहा है, लेकिन वास्तविक चुनौती आम लोगों की आय (प्रति व्यक्ति आय) बढ़ाने की है। इसके लिए स्वास्थ्य, पर्यावरण और मानव पूंजी में निवेश जरूरी है।
भारत के जीडीपी आंकड़ों को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि IMF के आकलन में भारत के जीडीपी डेटा में किसी बड़े दोष के ठोस सबूत नहीं मिले हैं, हालांकि आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने की प्रक्रिया लगातार जारी है।
गीता गोपीनाथ के इस बयान के बाद दावोस में यह चर्चा तेज हो गई है कि भारत की आर्थिक नीति में विकास के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण और स्वास्थ्य को केंद्र में रखना अब अपरिहार्य हो गया है।
